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सब खेल-खेल में चल रहा है:गुजरात दंगा दंगा नहीं था, व्यापमं और टूजी घोटाले घोटाले नहीं

खरी-खरी            Dec 21, 2017


तरूण व्यास।
कई बार लगता है कि क्या तो ये देश है और क्या तो इस देश की न्याय व्यवस्था है। सब खेल खेल में चल रहा है और जनता खेल खेल में खिलौना बनी हुई है। कभी कांग्रेस ने खेला तो अब बीजेपी खेल रही है।

गुजरात में दंगा होता है लाशों के ढेर लगा दिए जाते हैं लेकिन दोषी कोई नहीं होता। मतलब दंगा हुआ ही नहीं, कबड्डी के खेल में लोग मारे गए प्रदेश जला दिया गया।

व्यापम घोटाला होता है पचास लोग मौत के घाट उतार दिए जाते हैं और ना जाने कितने योग्य युवकों का हक़ मारा जाता है। इसमें भी मामा क्लीन चिट हो जाते हैं, थोड़े दिन में इसकी भी ख़बर सुन लेना घोटाला हुआ ही नहीं।

सलमान खान शिकार करता है लोगों को सड़कों पर कुचल देता है लेकिन दोषी नहीं होता है। तब जबकि गवाह एक पुलिस वाला होता है फ़िर भी टाइगर ज़िंदा रहता है।

आरुषि डबल मर्डर केस होता है। एक ही घर में दो दो लाशें मिलती हैं बरसों मुक़दमा चलता है लेकिन दोषी कोई नहीं होता।

किसी समय इस देश में टू जी घोटाले की ख़बर से सत्ता के नेता मंत्रियों को जेल का मुंह देखना पड़ा। सरकार कमजोर हुई विपक्ष मजबूत हुआ, अन्ना केजरीवाल हीरो बने, चुनाव हुए कांग्रेस हर जगह से गायब हुई बीजेपी हर जगह काबिज़ हुई और आज एक अदालत फ़ैसला सुनाती है टू जी घोटाले से जुड़े सभी आरोपी बरी किए जातें हैं। इस घोटाले से जुड़े कोई सबूत हैं ही नहीं। मतलब घोटाला हुआ ही नहीं।

गुजरात दंगा, दंगा नहीं था 300(थ्री हंड्रेड) फ़िल्म की कुश्ती थी। व्यापम घोटाला, घोटाला नहीं था उस वक्त मध्यप्रदेश के आरटीआई एक्टिविस्ट, एसटीएफ, सीबीआई, सत्ता और विपक्ष सब मिलकर "गोलमाल है भाई सब गोलमाल" गाने पर झूम रहे थे पता चला प्रदेश के मामा क्लीन चिट हैं। सलमान ने भी शिकार नहीं किया था, वो तो ब्लैकबग आया सलमान में देखा विष्णु का अवतार, किया प्रणाम छीनी बंदूक, दबाया ट्रिगर और त्याग दिए प्राण, हे प्रभु में धन्य हुआ और ड्रंक एंड ड्राइव का तो कोई मामला बनता ही नहीं। वो तो किसी फ़िल्म का एक्शन सीक्वेंस शूट हो रहा था।

अब आरुषि की हत्या की बात करें भी तो कैसे? हमारे देश में पड़ोसी के घर में रात में क्या हो रहा है जनता वो पता लगा लेती है और एक मां बाप को आवाज़ नहीं आई बच्ची और नौकर की हत्या हो गई। मानो कहानी ऐसी थी कि यमराज आए, कमरे में मारा आरुषि को छत पर मारा नौकर को औ चले गए अपने देश। फ़िर एक न्यायालय ने कहा आरुषि को किसी ने नहीं मारा। ऐसा ही तो था टू जी घोटाला माफ़ कीजिएगा जब कोई आरोपी ही नहीं तो काहे का घोटाला इसे कह दीजिए "किस्सा टू जी का"।

फेसबुक वॉल से।

 


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कभी-कांग्रेस-ने-खेला-तो-अब-बीजेपी-खेल-रही-है

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