दिग्विजय सिंह की बात में दम है

खास खबर            Sep 13, 2018


दीपक तिवारी।
मध्यप्रदेश की राजनीति में, मैं जितने भी नेताओं को क़रीब से जानता हूँ उनमें दिग्विजय सिंह के जीवन में ‘’कथनी और करनी’’ का अंतर बहुत कम है। सरल शब्दों में कहें तो पाखंड का अंश बहुत कम है।

दिग्विजय सिंह साफ़ साफ़ बोलते हैं और यही उनकी दिक़्क़त भी है। लेकिन समकालीन राजनीति में जिस तरह से ‘’जो बोला सो किया’’ का प्रतिमान उन्होंने स्थापित किया है, वह आज-कल के नेताओं में मिलना मुश्किल है !

जिस तरह से उन्होंने अपने 10 साल का संन्यास लेने का वचन पूरा किया और जिस तरह से अपने निजी जीवन से जुड़े मामले में ‘’साहस और मर्दानगी’’ का परिचय दिया, उसने उन्हें नरेंद्र मोदी से बेहतर इंसान के रूप में खड़ा किया है।

फिर छह महीने की कठिन पैदल नर्मदा परिक्रमा करके उन्होंने अपने आप को सच्चा हिंदू भी साबित किया। अब कह रहे हैं की अगले साल मानसरोवर यात्रा करेंगे । मैं जानता हूँ कि वह ज़रूर कर ही लेंगे।

जब मध्यप्रदेश में तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को कोर्ट के आदेश पर मकान ख़ाली करने के फ़रमान जारी हुए, तब केवल दिग्विजय सिंह अकेले थे जिन्होंने सरकारी बंगला ख़ाली किया ........ बाक़ी सबने पतली गली से बंगले वापस पा लिए।

मज़ेदार बात यह कि पूर्व-मुख्यमंत्रियों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा और सरकारी बंगला आजीवन रखने का प्रावधान दिग्विजय सिंह ने ही अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में किया था। विडम्बना देखिये जिसने ये क़ानून बनाया वही बाहर और बाक़ी सभी अंदर !

दिग्विजय सिंह बहुत अलग प्रकार के नेता हैं , उनकी बराबरी आज का भाजपा नेता नहीं कर सकता। हाँ, सुंदरलाल पटवा अवश्य उनकी टक्कर के थे।

आज भी सबसे ज्यादा कोई सड़क पर यदि कोई धूल फांक रहा है तो वह दिग्विजय ही हैं। आरएसएस तो मानों उनके लिए लाल कपड़ा है। आरएसएस के खिलाफ सैद्धांतिक लड़ाई को उन्होंने कोर्ट में पहुंचाया और ज़मीन की लड़ाई में भी कोई कोताही नहीं की।

साफ़-साफ़ बात करने के आदी दिग्विजय सिंह चुनाव भले हारे हों या उनके कारण कांग्रेस के वोटरों के बीच एक भ्रमपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई हो लेकिन इतिहास में RSS का दिलो-जान से विरोध करने वाले नेताओं में दिग्विजय सिंह का ही नाम जाएगा।

दिग्विजय सिंह आज भले ही लोगों को समझ में न आ पा रहे हों लेकिन वे विचारधारा और सिद्धांतों की लड़ाई ईमानदारी से लड़ने के कारण इतिहास में याद किये जायेंगे।

आपके अपने सिद्धान्तों के कारण इतिहास आपको याद करे ये कम बड़ी बात नहीं !!!!

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और द वीक पत्रिका के मध्यप्रदेश ब्यूरो हैं।

 



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