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सरकार कितनी भी दुलारी हो हाथ काटने की इजाजत कैसे दे सकते हैं ?

खास खबर            Jul 29, 2019


राकेश कायस्थ।
आरटीआई को लेकर लोगों की आवाज़ ना जाने क्यों इतनी धीमी है? सरकार चाहे आपकी जितनी भी दुलारी हो आप उसे अपने हाथ काटने की इजाज़त कैसे दे सकते हैं?

सूचना का अधिकार इस देश के लोगों को बहुत लंबी लड़ाई लड़कर हासिल हुआ था। मुझे याद है, जब यह कानून बना था, तब बीजेपी के भी कई नेता यह दावा कर रहे थे कि उन्होंने अपने स्तर पर इसके लिए बहुत संघर्ष किया है।

अपने पहले कार्यकाल में मोदी सरकार ने आरटीआई को प्रभावहीन बनाने की हर संभव कोशिशें की और अब तो संसद ने भी संशोधन विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है।

राष्ट्रपति का हस्ताक्षर एक औपचारिकता भर है। इसके बाद यह कानून महज एक झुनझुना बनकर रह जाएगा। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के 132 करोड़ लोग स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाएंगे। उन्हें कभी यह पता नहीं चल पाएगा कि उनके वोट से चुनी गई सरकार उनके हित या अहित में क्या कर रही है।

हमें यह याद रखना चाहिए मुनाफाखोर और मनोरंजक मीडिया के दौर मे सिर्फ आरटीआई का कानून ही था, जिसकी वजह से पिछले एक दशक में भ्रष्टाचार के अनगिनत मामलों का पर्दाफाश हुआ।

जनतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकारें अपने मूल स्वभाव में जनविरोधी होती हैं, इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन ज्यादा बड़ी चिंता की बात जनता का मुंह ना खोलना है। इसमें लोकतंत्र के भविष्य को लेकर बहुत डरावने संकेत छिपे हुए हैं।

 


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