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सुप्रीम कोर्ट ने अखिर क्या किया है एससी-एसटी एक्ट में

खास खबर            Apr 02, 2018


अरविंद सिंह।
एक ऐसे वक़्त में जब SC-ST एक्ट को लेकर पूरा देश जल रहा है, मैं 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर रिपोर्ट की गई अपनी स्टोरी के उस हिस्से का ज्यों का त्यों आपके सामने रख रहा हूँ आखिर कोर्ट ने किया क्या था!

फिर आप खुद ही तय करे कि अदालत का ये फैसला क्या फर्जी मुकदमों को हतोत्साहित करता है। एक check & blance का काम करता है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक
अगर किसी के खिलाफ एससी-एसटी उत्पीड़न का मामला दर्ज होता है, तो वो अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकेगा।

इन मामलों में तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी। इस एक्ट के तहत आने वाली शिकायतों पर शुरुआती जांच के बाद ही मामला दर्ज होगा।

सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी के लिए उनके विभाग के सक्षम अथॉरिटी की इजाजत ज़रूरी होगी ,जो लोग सरकारी कर्मचारी नहीं है, उनकी गिरफ्तारी के लिए एसएसपी की इजाजत लेनी होगी गिरफ्तारी की वजहों को रिकॉर्ड पर लाया जाना चाहिए।

जब आरोपी को कोर्ट की पेशी हो, तो मेजिस्ट्रेट को हिरासत बढ़ाने का फैसला लेने से पहले गिरफ्तारी की वजहों की समीक्षा करनी चाहिए।

SC/ST एक्ट के तहत झूठे मामलों से बचने लिए DSP एक शुरुआती जांच कर ये तय करेंगे कि क्या कोई मामला बनता है या फिर कहीं ग़लत नीयत से झूठे आरोप तो नहीं लगाए गए हैं।

इन गाइड लाइन का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों को विभागीय कार्रवाई के साथ—साथ अदालत की अवमानना की कार्रवाई का सामना करना होगा।

पुनश्च-
और हाँ कोई राय बनाने से पहले नेशनल क्राइम रिकॉड ब्यूरो के इन आंकड़ों पर भी गौर कर ले-

2015 में SC-ST एक्ट के तहत दर्ज किए गए कुल मामलों में 15 प्रतिशत में पुलिस ने क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की, ट्रायल ही नहीं हुआ।

2015 में जिन मामलों का कोर्ट ने निपटारा किया, उनमें से 75 फीसदी में या तो आरोपी बरी हो गए या शिकायतकर्ता ने वापस ले लिया।

2016 में एससी के खिलाफ कुल दर्ज किए गए केस में से 5347 केस फर्जी पाए गए।

लेखक न्यूज नेशन के पत्रकार हैं और सुप्रीम कोर्ट की बीट में काम करते हैं।

 


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