आग लगे रुकमा ददरी, दूध के मोल बिके गगरी,दो माह से कर्जमाफी की घोषणा फाईलों में

खास खबर            Aug 03, 2017


बांदा उत्तरप्रदेश से आशीष सागर।
दो माह से कर्जमाफी की घोषणा फाईलों में है। उत्तरप्रदेश बुंदेलखंड के हिस्से में सात ज़िले आते हैं। मध्यप्रदेश वाले 6 जिले और जोड़ दिए जाएं तो यह संख्या तेरह ज़िले में सिमटती है।
गाहे- बगाहे अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग भी यहां उठती रही है लेकिन आपसी गुटबाजी के चलते यह आंदोलन में अभी तक नही बदल सकी। किसान आत्म हत्या की सुखाड़ वाली चटियल धरती यूपी बुंदेलखंड सहित उत्तर प्रदेश के एक लाख तक के बकायेदार किसान का कर्जा माफ करने की घोषणा यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने 2 अप्रैल को की थी। उधर इलेक्ट्रानिक न्यूज़ चैनल में ये खबर ब्रेक हुई और इधर बाँदा के मटौन्ध कस्बे में 40 बीघा के कास्तकार कुलदीप सिंह ने आत्महत्या कर ली।

कुलदीप को ये फैसला साल गया कि सीएम ने किसानों का भी सियासी बंटवारा कर दिया। लघु और सीमांत किसान की कर्ज़ माफी का दांव बुंदेलखंड के किसानों पर भारी पड़ेगा ये किसान तबका अच्छे से जानता है। बतलाते चलें कि इस विधनसभा चुनाव में पूरी 19 सीट यहां से बीजेपी को मिली है। चार सांसद,19 एमएलए के सामने अब यूपी बुंदेलखंड के आने वाले साढ़े चार साल का भविष्य है। दो माह गुजर गए लेकिन अभी तक प्रदेश के कर्जदार किसानों का डाटा सरकार की 'किसान ऋण मोचक योजना' वेबसाइट पर फीड नहीं हो सका है।

सीएम ने 27 जुलाई की डेड लाइन बैंक के लिए डाटा प्रदेश सरकार को भेजने की रखी थी पर गांव से गिरांव तक खुले इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक का हाल बुंदेलखंड में और खराब है। अभी तक किसान के आधार कार्ड नंबर,किसान क्रेडिट कार्ड से लिया कर्ज, उनकी खतौनी आदि की जानकारी प्रदेश सरकार के पास नही पहुची है। सीएम की कर्जमाफी की घोषणा में लेट लतीफी के बीच केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली का प्रदेश सरकार को दो टूक अल्टीमेटम की आप अपने बूते पर कर्जमाफी करे, केंद्र सरकार इसमें कोई मदद नही करेगी उनकी अवसर वादिता को दर्शाता है।

गौरतलब है कि पीएम नरेंद्र मोदी सहित पूरी बीजेपी ने किसान की कर्जमाफी को चुनावी मुद्दा बनाया था। पीएम ने रैली में चित्रकूट मंडल के महोबा,झाँसी में कहा था कि हम सरकार में आते है तो सीएम की पहली कैबनेट बैठक में किसान की कर्जमाफी का ऐलान किया जायेगा। तब पीएम ने एक लाख तक के किसान की सीमा रेखा का ज़िक्र भी नही किया था। सरकार में आने के बाद ये छल किसान आत्महत्या का एक बड़ा कारण है।

बीते 1887 से 2016 तक इकीसवीं बार यहां सूखा पड़ चुका है। इस बार भी गत एक माह से मानसून कमजोर है पिछले साल की बनिस्बत इस बार बारिस कमजोर है। किसान धान के बेड़ लगा चुके हैं ऐसे में उनके लिए अब पानी की अदद दरकार है। चित्रकूट मंडल में ही अब तक 2500 किसान ख़ुदकुशी किये है बुंदेलखंड में ये आंकड़ा करीब 4,2,75 किसान माह मई तक है। चित्रकूट मंडल के 519 किसानों की पीएम रिपोर्ट का हमारे पास बेसलाइन सर्वे है जिसमे उनकी मौत का कारण कर्ज,मानसिक अवसाद, भुखमरी से पाई गई है।

सीएम की कर्जमाफी में प्रदेश के 86 लाख लघु सीमांत किसान का 36 हजार करोड़ रुपया कर्ज माफ होना है। अकेले बाँदा में ये किसान 1.20 लाख है जिनको लाभ होगा। पूरे जिले में डेढ़ लाख किसान पर 16.27 अरब रुपये कर्जा है। इनमे लघु और सीमांत किसान पर 8.73 अरब कर्ज बकाया है। ज़िले में 29,442 किसान इस कर्जमाफी से बेदखल हो जायेंगे। जालौन में किसानों की संख्या 2.50 लाख है,कर्ज लेने वाले किसान 2 लाख है,कुल कर्ज 16 सौ करोड़ है जिसमे डिफाल्टर किसान 80 हजार है।

वहीं बाँदा में 1,49,334 किसान है,इनमे 31,307 लघु , 88,585 सीमांत किसान है। कुल कर्ज 1680.50 करोड़ है। लघु पर 341.80 करोड़,सीमांत पर 531.50 करोड़ है। बुंसलखण्ड के बड़े किसान यहां की जोत सीमा के मुताबिक अपनी कर्जमाफी की मांग भी लगातार कर रहे है।
बुंदेलखंड के लिए यूपीए सरकार में 7266 करोड़ का बुंदेलखंड विशेष पैकेज भष्टाचार की भेंट चढ़ गया। उसके बाद एक के बाद एक राहत योजना आई पर प्रकृति विरोधी और किसान को उजाड़ करने वाली नीतियों ने उसको पनपने नही दिया। परंपरागत कृषि बीज के अभाव,मशीनीकरण,जल संकट ने बुंदेली किसान को तबाह कर दिया।

देश के अन्य राज्य की तरह यहां भी वोट बैंक ने जातिवाद की खेती से सियासत का पोषण किया। बाँदा का एक गांव पडुई किसान आत्महत्या के लिए ' सुसाइड विलेज ' के नाम से जाना जाता है यहां 2006 से अब तक 6 किसान आत्महत्या हुई है। सूखे के लिए यहां एक कहावत चलन में है। आग लगे रुकमा ददरी, दूध के मोल बिके गगरी। इसी 12 जून को बबेरू कस्बे के बिर रांव गांव में 50 हजार के साहूकारी कर्जे से आजिज दलित किसान 55 वर्षीय बंशी पुत्र रामआसरे ने खेत मे आत्महत्या कर ली थी। मौत के ठीक 6 दिन बाद उसकी बेटी शोभा का ब्याह होना था। आर्थिक तंगी ने किसान को चिंता से चिता में लिटा दिया। दो बीघा के सीमांत किसान की मृत्यु पर सरकारी बेशरमी की मार तब पड़ी जब एस डीएम बबेरू ने सरकार को प्रेषित रिपोर्ट में कीडें को अपराधी और शराबी बतला दिया।

स्थानीय मीडिया ने जब हल्के के सीओ ओमप्रकाश से यह जानकारी ली तो उन्होंने किसान के आपराधिक रिकार्ड से इंकार किया। मीडिया में यह खबर खूब उछली। इससे पहले भी प्रसाशन किसानों की मौत पर उनके चरित्र पर लांक्षन लगाता रहा है। मृतक किशोरी लाल साहू ( 6 जुलाई 2006 ) की मौत पर तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट नंदन चक्रवर्ती ने किसान की बेटी पर बदचलन होने के फर्जी आरोप लगाए थे जिसने बाद में किसान आंदोलन का रूप ले लिया था।

बैरहाल बुंदेलखंड के किसानों को सीएम की कर्जमाफी का बेसब्री से इंतजार है। सवाल ये भी है कि क्या कर्जमाफी समाधान है ? जी नही किसान को ब्याज मुक्त ऋण दिया जावे और उसको आजीवका पूर्ण किसानी की तरफ प्रशिक्षित किया जाए। हाल ही में एमपी का किसा आंदोलन और दिल्ली में जंतर मंतर पर तमिलनाडू के किसान चर्चा में रहे हैं। किसान की इस दुर्दशा पर यही कहा जा सकता है कि ' कातिल ने की कुछ इस तरह कत्ल की साज़िश, थी उसको नही खबर लहू बोलता भी है।

 



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