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8 साल से गले में डेरा बांधे भटक रहा विकलांग

खास खबर            Oct 24, 2017


दमोह से सुरेश नामदेव।
मामला है मध्यप्रदेश के दमोह जिले की तहसील पथरिया का जहां पर इस लाचार की पुकार किसी को नहीं सुनाई दे रही। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यह विकलांग करीब आठ वर्षों से अपना डेरा गले में बांधकर घूम रहा है। जहां सूर्य अस्त हो जाए वहीं गांव के किसी तिराहे या लोगों के घरों के बाहर लगी चादरों के नीचे रात बिता लेता है। गांव के लोगों के रहम पर जो खाने मिल जाए वही खा कर अपना पेट भर लेता है लेकिन निर्दयी प्रशासन को इस लाचार गरीब की करूण पुकार नहीं सुनाई दे रही।

पथरिया जनपद की ग्राम पंचायत किन्दरहो का निवासी यह व्यक्ति नौनेलाल पटेल शुरू से ही लाचार या गरीब नहीं है। वह हष्ट पुष्ट शरीर का मालिक था इसका भी घर था जमीन थी लेकिन बीमारी के चक्रव्यूह ने इस कदर जकड़ा कि सब कुछ बर्बाद हो गया। पांव में गैंगरीन की गंभीर बीमारी हुई और तीन ऑपरेशन होने के बाद भी पैर काटना पड़ा पहले ही इलाज कराते— कराते सड़क पर आ चुका था और फिर पैर कटने के बाद शरीर से भी लाचार हो चुका।

ऐसा नहीं कि इसे शासन से सुविधाएं नहीं मिलीं बल्कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मिलीभगत और भ्रष्टाचार की दीवार फांदकर इस मासूम तक वह सुविधाएं पहुंची ही नहीं जब नौनेलाल ने करूण रूदन कर अपनी दास्तान सुनाई तो आसपास खड़े लोगों की आंखों में आंसू आ गए लेकिन यह व्यक्ति इस बात से अंजान कि यह आंसुओं की धारा भ्रष्टाचार के लेख नहीं धो सकती।

नौनेलाल ने बताया कि उसके नाम से भी इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत कुटीर निकली थी लेकिन सरपंच सचिव वह भी डकार गए भ्रष्टाचार और लाचारी के बोझ तले यह विकलांग आठ वर्षों से अपनी ग्रहस्थी बैग में लेकर गले में टांगे घूम रहा है लेकिन शासन प्रशासन तक इसकी आवाज नहीं पहुंच पा रही।

 


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गले-में-डेरा

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