इंदौर नर्सरी है,पत्रकारिता,अधिकारी, राजनीति की :मुख्य चुनाव आयुक्त

मीडिया            Apr 10, 2018


डॉ. प्रकाश हिंदुस्तानी।
कल शाम को प्रेस क्लब के स्थापना दिवस समारोह और श्री राजेंद्र माथुर की पुण्यतिथि पर आयोजित चर्चा में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओ पी रावत ने कहा कि इंदौर एक नर्सरी है। चाहे वो अधिकारी हो या पत्रकारिता। वे यहां से निकलकर जो भी उपलब्धि हासिल करते हैं तो उसका श्रेय यहां के लोगों को जाता है। यहां के निकले पत्रकारों का डंका देश में तो बजता ही है, विदेश में भी उनकी पूछपरख है। विश्व में कहीं भी जाओ, यहां के पत्रकार मिल ही जाते हैं।

इंदौर को राजनीति की भी नर्सरी कह सकते हैं, क्योंकि मैं जब यहां कलेक्टर था तब जो म्युनिसिपल कॉरपोरेटर हुआ करते थे वे भी आज कहां से कहां आगे बढ़े हैं सब जानते हैं। मुझे माथुरजी से बहुत कुछ सीखने को मिला है।

मूलधन पत्रकारिता व संतुलित दृष्टिकोण सीखने से आपका भी वैल्यु एडिशन होता है। इंद्रियों को फ्री रखकर काम किया और पल्लवित हुआ और कहां से कहां पहुंचा, यह सोचा भी नहीं जा सकता।

देश में इलेक्शन कमिशन पर सबकी नजर है क्योंकि उसका काम है लोकतंत्र की रक्षा करना, सम्पूर्ण व्यवस्था का निष्पक्षता से संचालन कराना। लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि यदि 1.25 करोड़ लोग, राजनीति के लोग, मीडिया के सदस्य यदि प्रहरी के रूप में काम नहीं कर रहे हो तो एक 500 लोगों वाली छोटी सी संस्था कैसे पूरे देश में चुनाव करा दें, यह संभव नहीं है। यदि 70 वर्ष में देश की जो अनोखी उपलब्धि है वो है एरर फ्री चुनाव करना है। पूरा विश्व मानता है। इंटरनेशनल कॉफ्रेंसेस में जाता हूं तो सभी भारत की ओर देखते हैं। आस्ट्रेलिया, अमेरिका, यूके सभी भारत की ओर देखते हैं क्योंकि 87 करोड़ मतदाता कहीं पर भी नहीं है। वे सब सीखना चाहते हैं कि कैसे 500 लोगों की छोटी सी संस्था वहां पर चुनाव करा लेती है। देश में ईवीएम व मतदाता सूची को लेकर विवाद जरूरी है क्योंकि यदि गड़बड़ी सामने नहीं आएगी तो उसे सुधारेंगे कैसे। इसलिए यदि चुनाव से संबंधित कोई भी गड़बड़ी सामने आए तो उसे पूरी निडरता के साथ सामने लाएं।

एनके_सिंह_के_अनुसार :
माथुरजी के लेखन के सब मुरीद थे, तो उनके दायरे बहुत व्यापक थे। माथुरजी ने हिंदी को गढ़ने में योगदान दिया है। वे लिखते तो उसमें हिंदी का ठाठ और अंग्रेजी की रवानी नजर आती थी। इमरजेंसी और उसके बाद माथुरजी का स्वर्णिम समय था। याद है राम मंदिर का दौर जब आपातकाल जैसे हालत में रज्जू बाबू ही थे जिन्होंने लिखा था कि इस देश ही नहीं बचेगा तो हिंदुत्व को किस खूंटी पर टांगोगे? संपादक के तौर पर वे लिबरल थे और वे कइयों के लिए संपादक कम गुरू ज्यादा थे। हिन्दी पत्रकारिता की भाषा को गढऩे और उसे मांजने में उनकी अहम भूकिा रही।

प्रकाश_दुबे ने कहा :
यदि पत्रकार बनना है तो किसी के कथन से प्रभावित नहीं होना चाहिए। माथुर साहब भी किसी के पक्ष में नहीं लिखते थे। उन्हें एक किस्सा बताते हुए कहा कि आज के दौर में एक संपादक सेल्फी लेने के लिए लगा होता है, लेकिन राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री थे, तब माथुरजी उनके पास पहुंचे थे, उन्होंने कहा था कि आप मेरा इंटरव्यू करने आए हैं क्या, तो माथुरजी ने कहा था कि नहीं मैं तो आपसे बातचीत के लिए आया हूं इंटरव्यू के लिए तो मेरा पत्रकार आएगा।

इस कार्यक्रम में डॉ. प्रकाश हिंदुस्तानी ने 'राजेंद्र माथुर की परंपरा और वर्तमान मीडिया' की प्रस्तावना रखी।

ये हुये शामिल
डीएवीवी के कुलपति डॉ. नरेंद्र धाकड़, पद्मश्री अभय छजलानी, शहर काजी डॉ. इशरत अली, बाबूभाई महिदपुरवाला, भाजपा नगर अध्यक्ष कैलाश शर्मा, शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रमोद टंडन, रिटायर्ड एडीजी पन्नालाल, मप्र की मुख्य निर्वाचन अधिकारी सलीना सिंह, पूर्व कलेक्टर जी.पी. तिवारी, कलेक्टर निशांत वरवड़े, डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्र, एडीएम अजय शर्मा, इंदौर प्रेस के पूर्व अध्यक्ष कृष्णकुमार अष्ठाना, जयकृष्ण गौड़, शशीन्द्र जलधारी, सतीश जोशी, ओमी खंडेलवाल, जीवन साहू, वरिष्ठ पत्रकार कमल दीक्षित, संजय लुणावत, उमेश रेखे, प्रतीक श्रीवास्तव, महेन्द्र दुबे, रघुनाथ पंवार, सुनील जोशी, प्रवीण शर्मा, शक्तिसिंह परमार, लोकेंद्रसिंह चौहान, अमित सोनी, योगेंद्र जोशी, विमल गर्ग, नरेश तिवारी, सूरज उपाध्याय, सुधीर गुप्ता, अनुराग पुरोहित, लोकेंद्र थनवार, आशीष जोशी, राजेश मिश्रा, हेमन्त जैन, रेणु कासार, सरिता काला कांग्रेस नेता मोहन ढाकोनिया, गिरधर नागर, राजेश चौकसे, नरेंद्र सलूजा, अनिल यादव, मेहमूद कुरैशी, भाजपा के वरिष्ठ नेता गोपीकृष्ण नेमा, गोविंद मालू, हाजी इनात हुसैन, प्रदेश मीडिया सहप्रभारी सर्वेश तिवारी, देवीकीनंदन तिवारी, बालकृष्ण अरोरा (लालू), अभ्यास मंडल के अध्यक्ष रामेश्वर गुप्ता, शिवाजी मोहिते, अजितसिंह नारंग, आलोक खरे, मालासिंह ठाकुर, वैशाली खरे, समाजसेवी विनय पिंगले, कैलाश पेशवानी, फिरोजअली साइकलवाला, विधायक उषा ठाकुर आदि गणमान्य नागरिक शामिल थे।

 



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