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हिन्दू अखबार के आठ संपादकों को हुई थी जेल

मीडिया            Jan 06, 2018


मल्हार मीडिया भोपाल।
एक व्यवसायी प्रधान समाज होते हुए भी सिंधी पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन का लम्बा इतिहास रहा है। देश के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में भी सिंधी अखबारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। वर्ष 1911 मील का पत्थर था, जब राष्ट्रवादी विचार धारा के लोकुराम शर्मा ने सिंध से भास्कर नामक अखबार प्रकाशित किया था। तत्कालीन ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीति के कारण उन्हें कारावास जाना पड़ा। जिसकी वजह से अखबार बंद हो गया। लेकिन लोकुराम शर्मा ने हिम्मत नहीं हारी और कुछ वर्ष बाद कारावास से बाहर आने के बाद वर्ष 1924 में दैनिक अखबार हिंदू का प्रकाशन शुरू कर दिया।

कराची से वर्ष 1947 तक निरंतर यह अखबार प्रकाशित हुआ और बाद में इसका नाम हिन्दुस्तान हो गया। इस अखबार के एक के बाद एक आठ संपादक ब्रिटिश सरकार द्वारा बंदी बनाए गए। लेकिन उन्होंने हार न मानी और बाधाओं के बावजूद बार-बार फिर से अखबार का प्रकाशन प्रारंभ कर जन जागृति के लिए सक्रिय भूमिका अदा की गई।

स्वतंत्रता प्राप्ति और देश विभाजन के बाद भी लगभग 45 वर्ष अर्थात 1992 तक यह अखबार निरंतर छपा। बलदेव गजरा जैसे संपादक ने भी इस अखबार को लोकप्रिय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह जानकारी आज विधायक विश्राम गृह परिसर स्थित शहीद भवन, भोपाल में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा अखण्ड सिंधु संसार से सहयोग से आयोजित सिंधी पत्रकारिता पर दो दिवसीय संगोष्ठी में प्रदान की गई। संगोष्ठी का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर दीप जलाकर किया गया।

संगोष्ठी के प्रथम सत्र में डॉ. रोशन गोलाणी, अहमदाबाद, डॉ. सुरेश बबलाणी, अजमेर और बल्लू चौइथाणी, भोपाल ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इस अवसर पर इंदौर के किशोर कोडवानी ने उनके पिता स्व. श्री दीपक कोडवानी के संपादन में निकले मातृभूमि और शकुंतला समाचार पत्रों की लोकप्रियता और प्रभाव का विवरण दिया। संगोष्ठी के संयोजक ज्ञान लालवानी ने अतिथियों का स्वागत किया।

इस अवसर पर अजमेर से डॉ. कमला गोकलाणी, अहमदाबाद से चंदर सावनाणी, इंदौर से ईश्वर झामनाणी, भुसावल से दीपक चांदवाणी, रायपुर से प्रेम तनवाणी, कटनी से संजय खूबचंदानी, शहडोल से चंदन बहरानी, इटारसी से श्याम शिवदासानी, मनोज बुधवानी, बिलासपुर से विजय दुसेजा और भोपाल के अनेक पत्रकार और संपादक उपस्थित थे।

संगोष्ठी में सिंधी समाचार पत्रों द्वारा भाषा संरक्षण और सामाजिक एकता के लिए निभाई जा रही भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन से संबंधित समस्याओं पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। रविवार को संगोष्ठी दोपहर 3 बजे से समन्वय भवन, न्यू मार्केट, भोपाल में आयोजित की जाएगी। अशोक बुलानी के निर्देशन में शाम 6 बजे से दो सिंधी नाटक भी मंचित किए जाएंगे।

 


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