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दुकान वाले का ग्राहक ज्ञान, अपने वाले चैनल

मीडिया            Oct 25, 2017


आशीष चौबे।
रोज़मर्रा की तरह दफ्तर के काम निपटाने के बाद गाड़ी के पहिए घर की दिशा में तेज़ी से लुढ़क रहे थे। मोबाइल अपना मूल काम छोड़कर फिलहाल किशोर दा के गाने सुना रहा था । दफ्तर से घर की ओर का कुछ फासला ही तय हुआ होगा कि अचानक मोबाइल बाबू संगीत सेवा छोड़कर मूल काम पर आ गए। श्रीमती जी का संदेश था। तत्काल फोन गाड़ी के डेश बोर्ड का स्थान छोड़ कान पर आ चिपका।

श्रीमती जी ने वन लाइनर अंदाज में अपनी बात रख दी..। "कब तक आ रहे हो ? औऱ आते हुए डीटीएच रिचार्ज ज़रूर करवा देना ..। उत्तर की औपचारिकता के बाद फोन पुनः अपनी संगीत सेवा में जुट गया और गाड़ी ने डीटीएच रिचार्ज वाली दुकान की ओर रुख कर लिया ..।

रिचार्ज की यह दुकान कई साल से तय थी लिहाजा दुकान मालिक से पहचान भी खासी थी । रिचार्ज के साथ पन्द्रह बीस मिनट की गप्पें हो ही जाती थी। नमस्कार और हालचाल की औपचारिकता के बाद रिचार्ज का आदेश कर दिया अपन ने...। रिचार्ज होने की प्रक्रिया के साथ ही गपियाना शुरू हो गया ..। मस्त गप्पों में व्यवधान डाला एक अन्य ग्राहक महोदय ने..। साहब को नया डीटीएच चाहिए था ..।

दुकानदार शायद पहले से ही ग्राहक को और उनकी पसंद-नापंसद को अच्छी तरह से जानता था ...सो तत्काल ग्राहक की पसंद के अनुसार एक कंपनी की डीटीएच सेवा की तारीफ करते हुए एक विशेषता और पकड़ा दी कि.."सर...इसमें वो सभी न्यूज चैनल आते है,जो अपने वाले है....।

"चैनल..अपने वाले"...यह लाइन अपने समझ के बूते से बाहर थी..। अरे खबरिया चैनल तो खबर ही देंगे...अपने और पराए का इसमें क्या मसला...? खैर ग्राहक इस विशेष जानकारी हासिल करने के बाद खुश हो गया और सौदा चन्द मिनिट में परवान चढ़ गया...।

घर जाने की जल्दी थी लेकिन अपने और पराए चैनल की फर्क की पहेली जानने को मैं विवश हो गया ..। ग्राहक के रवानगी डालते ही मैंने बिना कोई देर किए अपने सवाल को दुकानदार की ओर उछाल दिया ..। दुकानदार मुस्कराया और धीमे से बोला सर यह सब ग्राहकी की कला है....लेकिन आयडिया आप पत्रकारों के वजह से ही आया । मुझे उत्तर जानना तो दो टूक पूछा कि भाई सीधे सीधे बताओ ....आखिर मतलब क्या...

दुकान वाले ने जो बताया वो मेरे जैसे खबरची के लिए झटके वाला था । दुकानदार ने स्पष्ट किया .."देखिए सर..सभी खबरिया चैनल किसी एक डीटीएच पर तो हैं नही और फिर सस्ते महंगे की मगजमारी..... इसलिए मैंने के नया फ़ंडा निकाला है कि जब ग्राहक आता है .... यदि वह पहचान का है तो कोई समस्या नही और यदि अजनबी है तो पांच से दस मिनिट राजनीति की बात करता हूँ ...। इस दैरान मुझे समझ आ जाता है कि उसकी विचारधारा और झुकाव के बारे में...फिर उसी की पसंद के अनुसार उत्पाद थमा देता हूँ ।

मैं उसके ग्राहक ज्ञान को समझने की कोशिश कर रहा था...लेकिन दुकानदार समझ गया कि मेरे ऊपर के माले में बात अब तक समझ नही आई...सो फिर उसने समझाने के अंदाज में बोला....सर देखिए..यदि कोई सत्ता पक्ष के प्रति झुकाव रखता है तो तत्काल जी टीव्ही,आजतक, जी हिंदुस्तान,इंडिया टीव्ही,रिपब्लिक जिस पर आते है वो वाला डीटीएच बता देता हूँ और जो मोदी को पानी पी पी कर कोसते है उन्हें एनडीटीवी,टाइम्स नाउ जैसे चैनल जिस डीटीएच प्लेटफॉर्म पर मौजूद है वो आगे बढ़ाता हूँ..।


ज्ञानवान दुकानदार ने अपनी बात को औऱ स्पष्ट किया...सर जो सत्ता पक्ष प्रेमी है वह कड़वी सच्चाई को भी दरकिनार करके सिर्फ और सिर्फ सरकार की तारीफ ही सुनना चाहता है तो वही जो विपक्ष की विचारधारा से प्रभावित हैं तो वह किसी भी कीमत पर यह मानने को तैयार नही कि देश में तनिक भी कुछ अच्छा काम बीते तीन सालों में हुआ है..बस मोदी निंदापुराण में ही उनको काफी सुकून मिलता है...।

चैनल भी बंट गए हैं कोई खबरिया चैनल सिर्फ भक्ति में व्यस्त होकर देश की दिन दूनी रात चौगनी तरक्की का राग अलापता रहता है तो कुछ चैनल हर तरफ सिर्फ बर्बादी और बर्बादी का रोना रहते है। कुल जमा हर चैनल का अपना एजेंडा सेट है और उस एजेंडे के लिए पत्रकारिता के मापदंडों की पुड़िया बनाकर अपने राजनीतिक आकाओ के चरणों में समर्पित कर चुके हैं।

दुकान वाला इस फंडे को समझ गया लेकिन हम खबरची लोग समझते हुए भी नासमझ बनकर मोहरा बनते जा रहें है। असल खबर पर्दे से बाहर है। खबर पर्दे पर वही है जो सियासतदां चाहते हैं। मीडिया मालिकान चाँदी काट रहें हैं। आम लोग गुमराह हो रहे हैं। पत्रकारिता लगभग दम तोड़ चुकी है और चाटुकारिता शबाब पर आ गई है...।

शायद पढ़ने या सुनने में बात आम हो लेकिन ज़रा सोचिए लोकतंत्र का यह चौथा स्तम्भ यदि पूर्ण रूप से धराशाही हो गया तो इस देश का क्या भविष्य होगा...?

गाड़ी के पहिए फिर से घर की दिशा में लुढ़कने लगे लेकिन दिमाग तो मानो दुकान पर ही उलझ कर रह गया था......उफ्फ्फ...।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, यह आलेख उनके फेसबुक वॉल से लिया गया है।

 


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