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सूचना आयुक्त के पदों पर नियुक्तियों के लिए अवैधानिक चयन अजय सिंह

समाचार            Oct 05, 2018


मल्हार मीडिया भोपाल।
मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने आज सूचना आयुक्त पदों पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा द्वारा की गई अवैधानिक नियुक्तियों के लिए किए गए पद चयन के संबंध में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा और पद का दुरुपयोग करने पर लोकायुक्त को शिकायत की। श्री सिंह ने राज्यपाल महोदया की अनुपस्थिति में यह ज्ञापन उनके सचिव श्री डी.डी. अग्रवाल को सौंपा।

नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में कहा कि सूचना आयुक्त के पांच पद पर नियमों के विपरीत जाकर विशेषकर सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों एवं सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित व्यवस्था और भारत सरकार द्वारा निर्धारित पारदर्शी प्रक्रिया की अव्हेलना करते हुए मेरी अनुपस्थिति में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री नरोत्तम मिश्रा द्वारा जिन नामों का चयन किया गया है, वह पूरी तरह अवैधानिक है। जिसके कारण निम्नानुसार हैं-

1. राज्य सरकार ने 25 दिसंबर 2016 को सूचना आयुक्त के दो पदों के लिए और बाद में 3 मई 2018 को पुनः विज्ञापन जारी किया। इन दोनों विज्ञापनों के जरिए सामान्य प्रशासन विभाग को 187 आवेदन प्राप्त हुए।
2. दिनांक 1 अक्टूबर को कथित रूप से हुई बैठक में 5 लोगों को सूचना आयुक्त पद के लिए चयनित किया ऐसा मैंने समाचार पत्रों में पढ़ा। क्योंकि सरकार ने इन खबरों का कोई खण्डन नहीं किया है इसलिए इसे अधिकृत खबर माना जा सकता है।
3. सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र क्र. एफ 11-277/2016/सूअप्र/1-9/513 भोपाल दिनांक 20 जुलाई 2018 के साथ जो संक्षेपिका मुझे उपलब्ध कराई गई उसके अनुसार सूचना आयुक्त के 2 पदों पर चयन करने के प्रस्ताव का उल्लेख किया गया था। उसके बाद मुझे कोई संशोधन प्राप्त नहीं हुआ एवं प्राप्त जानकारी अनुसार 5 लोगों के लिए अनुशंसा माननीय राज्यपाल महोदया को की गई।
4. मेरे द्वारा सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों को मेरिट के आधार पर शार्टलिस्ट कर पेनल बनाकर चयन समिति की बैठक के पूर्व प्रस्तुत करने के लिए कई मर्तबा अनुरोध किया गया किन्तु मप्र शासन ने अनुरोध को अस्वीकार किया। यहां यह बताना उचित होगा कि भारत सरकार के केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय द्वारा केंद्रीय सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों को मेरिट पर शार्टलिस्ट करने हेतु कैबिनेट सेकेट्री की अध्यक्षता में सर्च कमेटी का गठन किया गया। इस सर्च कमेटी में कैबिनेट सेकेट्री के अतिरिक्त भारत सरकार के चार सेकेट्री एवं 1 विषय विशेषज्ञ भी शामिल किए गए हैं।
5. सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 15(3) के तहत चयन समिति जिसमें मुख्यमंत्री नेता प्रतिपक्ष और कैबिनेट मंत्री सदस्य होते हैं द्वारा उपर्युक्त उम्मीदवारों के चयन की अनुशंसा एवं उनके प्रख्यात होने का विवरण राज्यपाल को प्रेषित करते हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 15 (3) के अनुसार समिति का गठन दिनांक 22.03.2017 को किया गया था। समिति में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सरकार सिंह चौहान, मैं स्वयं एवं श्री नरोत्तम मिश्रा सदस्य थे। उक्त समिति की बैठक के पूर्व मेरे द्वारा वैधानिक आपत्तियां उठाईं कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जो आदेश पारित किए गए हैं और जो दिशा-निर्देश दिए गए हैं उसका पालन नहीं किया गया है परंतु श्री शिवराज सिंह चौहान एवं श्री नरोत्तम मिश्रा के दबाव में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की की अव्हेलना करते हुए दिनांक 01.10.2018 को बैठक में उपस्थित होने में असमर्थता होने में असमर्थता व्यक्त की क्योंकि मैं उक्त दिनांक को दिल्ली में था।
6. मेरी जानकारी के अनुसार दिनांक 01.10.2018 को बैठक निरस्त कर दी गई थी जिसका प्रमाण यह है कि मुख्यमंत्री का जो दिनांक 01.10.2018 का कार्यक्रम जारी हुआ था उसमें 4.00 बजे की बैठक का कोई कार्यक्रम नहीं था परंतु बाद में 5.00 बजे सूचना आयुक्तों के संबंध में बैठक मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में जोड़ गया और बैठक की गई उक्त बैठक में, मैं उपस्थित नहीं था। बाद में मुझे ज्ञात हुआ कि मेरी अनुपस्थिति में बैठक की गई और 5 सूचना आयुक्तों की नियुक्ति हेतु अनुसंशा माननीय राज्यपाल महोदय को प्रेषित कर दी गई जबकि जो विज्ञापन निकाला गया था वह 2 पदों हेतु निकाला गया था।
7. इस संबंध में माननीय मद्रास उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में एस. विजयलक्ष्मी विरूद्ध स्टेट ऑफ तमिलनाडू (2012) 1 मद्रासएलजे 721 एवं केरल उच्च न्यायालय ने भी अपने निर्णय स्टेट ऑफ केरल विरूद्ध अकंठिल अजय कुमार व अन्य (2017) 4 केएलजे में यही स्पष्ट किया है कि जब तक समिति के समस्त सदस्य उपस्थित न हों तो कोई अनुसंशा नहीं की जा सकती। उपरोक्त निर्णयों में सूचना आयुक्त की नियुक्ति को निरस्त कर दिया गया है।
8. इसके अतिरिक्त माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने प्रकरण क्र. WP 210/2012 नमित शर्मा विरूद्ध यूनियन ऑफ इण्डिया विरूद्ध नमित शर्मा में अपने आदेश दिनांक 03.09.13 में चयन हेतु गाईड लाईन बनाई है जिसका पालन भी जानबूझ कर नहीं किया गया है।

श्री सिंह ने ज्ञापन में राज्यपाल से कहा कि 01 अक्टूबर 2018 को चयन समिति की बैठक मेरी अनुपस्थिति में हुई जिसमें मुख्यमंत्री एवं संसदीय कार्यमंत्री ने पांच सूचना आयुक्त पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन करने का अवैधानिक निर्णय लिया। इस संबंध में कृपया वैधानिक कदम उठाएं।

 



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