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व्यापम वार:सिब्बल ने सीएम को बताया व्यापम की जड़ तो भाजपा ने दिग्विजय को कहा आदतन अपराधी

समाचार            Sep 22, 2018


मल्हार मीडिया भोपाल।
मध्यप्रदेश की राजनीति में चुनावों के पहले व्यापम का मुद्दा फिर गरमा गया है। आज जहां कोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बयान होते रहे वहीं बाहर दोनों पार्टियों के प्रदेश कार्यालयों में आरोप-प्रत्यारोप के दौर पत्रकार वार्ताओं में चलते रहे।

पूर्व केंद्रीय मंत्री वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि बहुचर्चित व्यापमं घोटाले की जड़ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हैं। तो जवाब में सरकार के जनसंपर्क मंत्री ने दिग्विजय को आदतन अपराधी कह दिया।

कपिल सिब्बल आज भोपाल जिला न्यायालय में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा दायर प्रायवेट कंपलेंट में वकील की हैसियत से आए थे। इस दौरान प्रसिद्ध अधिवक्ता विवेक तनखा भी मौजूद थे।

उन्होंने बताया कि दिग्विजय सिंह की ओर से दायर याचिका में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा सायबर एक्सपर्ट प्रशांत पांडे के माध्यम से डाऊनलोड कराई गई हार्ड डिस्क के डाटा को आधार बनाया गया है। जिसे हैदराबाद की ट्रूथ लैब द्वारा सही बताया गया था।

इस मामले म़ें इंदौर पुलिस और एस टी एफ द्वारा डाटा के साथ छेड़छाड़ कर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को क्लीन चिट देने का अपराध किया गया था।

श्री सिब्बल ने आरोप लगाया कि पहली बार जब्त हुए डाटा में व्यापम के माध्यम से प्रवेश कराने वाले सिफारिश कर्ता के तौर पर 48 बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का नाम और मिनिस्टर वन , मिनिस्टर टू और मिनिस्टर थ्री के साथ—साथ पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का नाम भी शामिल है।

उधर मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस और उसके नेताओं को देश की कानून व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं है। इसीलिए वे चुनावी समय में जनता के बीच जाने की बजाय एक ऐसे मुद्दे को लेकर अदालत जा रहे हैं, जिसे पहले ही देश की सबसे बड़ी अदालत खारिज कर चुकी है।

उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को जमकर आड़े हाथों लिया और कहा कि दिग्विजय सिंह राजनीति के अखाड़े के आदतन अपराधी है, जिन पर अदालत के फैसलों और फटकार का भी कोई असर नहीं होता। उन्होंने कहा कि राजनीति में बहिष्कार के शिकार दिग्विजय सिंह अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए नए नए हथकंडे आजमा रहे हैं और नित नए झूठ का सहारा ले रहे हैं। डॉ. मिश्रा ने कहा कि मान. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही व्यापमं मामले की सीबीआई से जांच कराई गई थी। इस जांच में रिपोर्ट दी गई थी कि सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप झूठ है। लेकिन न्यायपालिका का निरंतर अपमान करने के आदी दिग्विजय सिंह अब फिर से इसी मामले को लेकर स्पेशल कोर्ट पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह का यह आचरण लोकतंत्र और उससे संबंधित संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादाओं के सर्वथा विरूद्ध है।


मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने दिग्विजय सिंह एवं कांग्रेस के अन्य नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए सवाल किया कि लोकतंत्र में जनता की अदालत सबसे बड़ी अदालत होती है, कांग्रेस के नेता इस मामले में जनता के बीच क्यों नहीं जाते। डॉ. मिश्रा ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता इस मामले को कांग्रेस द्वारा भारी तूल दिए जाने के बावजूद मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान के पक्ष में निर्णय देकर कांग्रेस को उसकी करतूतों पर आइना दिखा चुकी है, लेकिन कांग्रेस उस जनादेश का सम्मान भी नहीं करना चाहती।

मीडिया से चर्चा करते हुए मंत्री डॉ. मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान अपनी जनआशीर्वाद यात्रा के दौरान पूरे प्रदेश का दौरा कर रहे हैं और हर विधानसभा क्षेत्र के गांव गांव में जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को मिल रहा जनसमर्थन उनकी सबसे बड़ी पीड़ा बन गया है और वे इसी बात के लिए व्याकुल हैं कि मुख्यमंत्री जी की छवि को किस तरह खराब किया जाए। इसीलिए वे उन्हें कभी वेश्या, कभी मदारी तो कभी डायर कहते हैं।

इससे कुछ नहीं होता, तो उनके रथ पर पत्थर फिंकवाने का काम करते हैं। जब उससे भी कोई व्यवधान पैदा नहीं हुआ, तो अब अदालत का सहारा ले रहे हैं। डॉ. मिश्रा ने कहा कि इसी के चलते कांग्रेसी नेता और वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने भी संबल योजना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है, ताकि प्रदेश के गरीबों को सरकार की इस योजना का लाभ न मिल सके।

 

 



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