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फिल्म समीक्षा:पंजाबी फिल्म का रीमेक है झूठा कहीं का

पेज-थ्री            Jul 20, 2019


डॉ.प्रकाश हिन्दुस्तानी।
40 साल पहले भी ऋषि कपूर ने 'झूठा कहीं का' नाम की फिल्म में काम किया था, जिसमें उनके साथ नीतू कपूर प्रमुख भूमिका में थीं।

रवि टंडन के निर्देशन में बनी उस 'झूठा कहीं का' और इस 'झूठा कहीं का' में ज़मीन-आसमान का अंतर है।

यह पंजाबी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'कैरी ऑन जट्टा' की रीमेक है। पुरानी फिल्म की तरह ही इसमें भी ऋषि कपूर प्रमुख भूमिका में हैं, लेकिन वे हीरो नहीं हैं।

हालांकि फिल्म उन्हीं के कंधे पर सवार है। कारण यह है कि लिलेट दुबे, सनी सिंह, ओंकार कपूर, निमिषा मेहता आदि सभी नए कलाकार इस फिल्म में है।

जिमी शेरगिल, मनोज जोशी और राकेश बेदी की भी छोटी भूमिकाएं हैं।

अंत में सनी लियोनी का एक आइटम सांग भी डाल दिया गया है , जिसे देखने के लिए दर्शक थियेटर में रुकने की जहमत नहीं उठाते।

'झूठा कहीं का' एक कॉमेडी फिल्म है। जिसमें एक नौजवान झूठ बोलकर शादी करता है और बाद में अपने ही झूठ में उलझता ही चला जाता है। एक झूठ को छुपाने के लिए कितने झूठ बोलने पड़ते हैं और यह झूठ आदमी के लिए कितनी मुसीबत बन जाते हैं।

उसका एक दोस्त भी इसी मजने का है। इन्हीं बातों को मनोरंजक तरीके से इस फिल्म में प्रदर्शित किया गया है। प्यार पाने के लिए अनाथ होने का झूठा जाल और फिर फंसने की कहानी।

कहानी के पृष्ठभूमि पंजाब की है और पंजाबी परिवार की आपसी चर्चा को लेकर अनेक बातें इसमें कहीं गई है। फिल्म के कई संवाद महिलाओं की बेइज्जती करते लगते हैं।

फिल्म की शुरुआत में कार्टून के जरिए बनाए गए टाइटल से ही स्पष्ट है कि फिल्म हल्के-फुल्के मनोरंजन के लिए है। इसमें बहुत गंभीरता की आशा नहीं की जा सकती। फिल्मों में यो यो हनी सिंह, अमजद नदीम आमिर, संजीव अजय, राहुल जैन, सिद्धार्थ मैथ्यू आदि का म्यूजिक है ,जबकि गाने फिल्म में पांच ही हैं।

ऋषि कपूर अपनी खराब सेहत के लिए इलाज करा रहे हैं, ऐसे में यह फिल्म रिलीज कर दी गई है। दर्शकों को लगता है कि ऋषि कपूर की वापसी हो गई है लेकिन ऋषि कपूर पूर्णतः स्वस्थ नहीं हुए हैं।

इन्हीं निर्देशक समीर कंद की पंजाबी फिल्म कैरी ऑन जट्टा खूब पसंद की गई थी लेकिन हिन्दी के दर्शकों का मिजाज़ कुछ अलग होता है, यह बात शायद वे समझ नहीं पाए। जीजा-साले और पति-पत्नी की घटिया नोकझोंक कई बार दर्शक का मूड खराब कर देती है।

कुछ डायलॉग महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं। मॉरीशस की खूबसूरती भी फिल्म में सलीके से नहीं दिखा पाया निर्देशक।

पूरी फिल्म में मॉरीशस में बिना हेलमेट के ही तमाम कलाकर मोटर साईकिल दन्नाते रहते हैं। वहां फैला भ्रष्टाचार भी दिखाया गया है।

कॉमेडी के शौकीन फिल्म देख सकते हैं। फिल्म में हंसने-हंसाने के कई मौके आते हैं।

 


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