ये सियासत की तवायफ़ का दुपट्टा है किसी के आँसुओं से तर नहीं होता ।

राजनीति            Mar 09, 2019


राकेश शर्मा।
हमारे मुख्यमंत्री कमलनाथजी शपथ लेते ही वन-डे की तर्ज़ पर धुआँधार बैटिंग कर रहे हैं। देखिये न ७६ दिन में ८३ वचन पूर्ण हो गए ...
अभी ६ मार्च को मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार सागर पधारे कमलनाथजी यहाँ भी बहुत जल्दी में दिखे ! आना-जाना सब मिलाकर पूरे घंटे भर में सभी वचन पूरे कर दिये...”चाये आपके विश्वविद्यालय की बात हो, चाये तालाब की, चाहे सड़कों की, फ़्लाई ओवर की और चाहे आईटी पार्क”...तस्वीर बदल दी सागर की नाथसाब ने, वह भी मात्र एक घंटे में !

मुख्यमंत्री कमलनाथ सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक महामानव हरीसिंह ग़ौर की पावन धरा पर उतरे और समाधि प्रांगण (जहाँ ग़ौर साब के साथ अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल भी विराजित हैं) के सामने से गुज़रे। अच्छा होता आपको इन पुण्य आत्माओं का आशीर्वाद प्राप्त होता ? आपके साथ रहे मंत्री अथवा तो कोंग्रेस अध्यक्ष को इस हेतु पहल करनी चाहिये थी। ख़ैर...

अब चलें कार्यक्रम स्थल की ओर जहाँ आपा धापी है,ज़ोर आज़माइश है, मंच पर पहुँचने की होड़ है। हर कोई फ़ोटो में आने को आतुर है यह सब तो सामान्य है होता ही है, असामान्य और मज़ेदार बात जो यहाँ मैंने महसूस की वो यह कि जिले के दो मंत्री एवं संगठन के लोगों की उपस्थिति में मंच संचालन की बागडोर भाजपा और आरएसएस के हाथ रही ?

माननीय कमलनाथजी आपके कुशल हाथों में संगठन की बागडोर भी है। अच्छा लगा था जब आपने कहा था-मंत्रियों को कांग्रेस कार्यालय में बैठना होगा,कार्यकर्ताओं की बात सुनना होगी, उन्हें तवज्जो देनी होगा। आप सागर आये तो हम जैसे कार्यकर्ता से मिलना तो दूर आपको आँख भर देख भी न पाये !

अब आगे जब सागर पधारें कुछ समय लेकर आइएगा।
नेतृत्व का मूल आधार है ..आशा जगाये रखना! आप आशायें, उम्मीद का चूल्हा जलाये रखने में कामयाब हुए तभी तो हमारी सरकार बन पाई। अब लोकसभा चुनाव के परिणाम अनुकूल आयें और आप वचनानुसार सागर की तस्वीर बदल पायें इसके लिये ज़रूरी है कि आप दिखावटी, बनावटी,मिलावटी, स्वार्थी और निष्ठावान कांग्रेसजनों के मध्य परख-पहचान कर तदानुसार कार्यवाही करें।

क्योंकि विश्वास बे-आवाज़ टूटता है और गहरा घाव दे जाता है ..पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इसकी ताज़ी मिसाल हैं।

यूँ भी सत्ता का रंग कुछ कुछ शराब की तरह ही होता है जितने पैग लो उतनी ही चढ़ती जाती है लेकिन समय सर्कस की भाँति सदैव सामान बाँधता और डेरा बदलता रहता है। सरकार के सामने हर क़दम हाथ मिलाने वाले बहुत हैं इनमे साथ निभाने वाले कितने हैं?

यह परीक्षण आपके मंत्रीगण केवल पार्टी हित को सर्वोपरि रखते हुए संपूर्ण ईमानदारी व निष्ठा से करे तभी कांग्रेस मौजूदा राजनैतिक कसौटी पर कामयाब अवश्य हो सकेगी। नये मंत्रीगण धूप, मिट्टी, हवा को न भूलें तथा स्मरण रखें कि शोहरत,बुलंदी तो समय का तमाशा मात्र है जिस शाख़ पर बैठे हो वह कभी टूट भी सकती है।

वैसे भी हाल में संपन्न विधान सभा चुनाव में मध्यप्रदेश के जनमन ने न आपको जिताया है और न ही उन्हें हराया है !

माननीय कमलनाथजी, जो देख सुन समझ परख रहे हैं सो निष्ठावान कार्यकर्ताओं की पैरवी करते हुए आपके समक्ष परोस दिया है। ग्रहण करें न करें आपकी मर्ज़ी..
अदव गंडवी ने कहा है - ये सियासत की तवायफ़ का दुपट्टा है किसी के आँसुओं से तर नहीं होता ।
अंत में सभी मित्रों से केवल यही कह सकता हूँ-
“ तन कर खड़ा रहा जड़ों से उखड़ गया
जो पेड़ न था वाक़िफ़ हवा के मिज़ाज से

लेखक सागर विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष रहे हैं।

 


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