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सोचिये! आप क्या कर रहे हैं ? 15 साल बाद लौटे हैं पर नये नहीं, वंदेमातरम किसी की बपौती नहीं

राजनीति            Jan 02, 2019


राकेश दुबे।
मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार ने भी मायावती की धमकी के आगे घुटने टेक दिए, सरकार गिरने के डर से। भला हो प्रदेश के नये विधि मंत्री पी सी शर्मा का उन्होंने कुछ और मुकदमों को इस फेहरिस्त में जोडकर सरकार की लाज रख ली।लेकिन वन्देमातरम का गायन रोकना कहीं से भी “विवेकपूर्ण फैसला” नहीं है।

कांग्रेस सरकार में १५ साल बाद लौटी है पर नई नहीं है। इस सरकार ने सत्ता में लौटते ही अटल बिहारी वाजपेयी के सुशासन से सबक लेने की बात कही थी। वाजपेयी ने सरकार का मोह छोड़ दिया था, सरकार से ज्यादा जरूरी है देश हित और देश प्रेम।

“वंदेमातरम्” किसी एक राजनीतिक दल का विचार नहीं है, इस पर न तो कांग्रेस का ठप्पा लगना चाहिए न इसे भाजपा या संघ की बपौती माना जाना चाहिए। ये तो आज़ादी के मतवालों का गीत है और देश भक्ति का प्राण है, जिसे गाते हुए वर्ष 1942 में मातंगिनी हाजरा ने सीने पर गोलियां खाई थी। उसे अपने इतिहास से जोड़ने वाली कांग्रेस से ऐसे कदम की अपेक्षा नहीं थी। कमलनाथ ने भूल सुधार का आश्वासन दिया है, भूल करने के बाद।

मायावती के मायाजाल में में फंसकर कांग्रेस ने मध्यप्रदेश और राजस्थान में 2 अप्रेल 2018 को हुई हिंसा के मुकदमे वापिस लेने का फैसला लिया है।

यह सवाल भी दोनों पार्टियों से है क्या सर्वोच्च न्यायालय से उपर उसके निर्णय की अवहेलना करने वाले दंगाई हैं? जिस संविधान ने आपको मुकदमे वापिस लेने का अधिकार दिया है उसी के पन्ने पलटिये, वही संविधान देश में न्यायपालिका को सबसे ऊपर बताता है।

याद रखिए यह मात्र बहस या वोट बैंक का मुद्दा नहीं है, उससे ज्यादा है, समाज का ताना-बाना है, उसे मत तोडिये।

2 अप्रेल 2018 को 12राज्यों में महज इसलिए हिंसा हुई थी कि मार्च 2018 में ही सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी कानून में कुछ बदलाव किया था। इसके विरोध में दलित संगठनों ने 2 अप्रैल को भारत बंद बुलाया था।

इस दौरान मध्यप्रदेश,राजस्थान, उत्तरप्रदेश और बिहार समेत 12 राज्यों में हिंसा फैली थी।

14 लोगों की मौत भी हुई थी। हिंसा के बाद प्रशासन ने दलित संगठनों के कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज किए थे। क्या मरने वाले किसी दल के मतदाता नहीं थे, क्या देश का कानून इसे सदोष मानव वध मानने को तैयार नही है?

तो फिर ऐसे मुकदमे वापिस लेकर क्या संदेश दे रहे है ? फिर से पी सी शर्मा को बधाई देने का मन है, लाज बचाने की कोशिश के लिए।

मध्यप्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं। यहां कांग्रेस ने 114 सीटों पर जीत हासिल की है। बहुमत के लिए 116 सीटें चाहिए थी। ऐसे में कांग्रेस ने 3 निर्दलीय, 2 बसपा और 1 सपा विधायक के समर्थन से सरकार बनाई।

सही है, पर क्या यह शर्त थी कि हिंसा के मुकदमे वापिस होंगे? राजनीतिक विद्वेष के मुकदमे हमेशा वापिस हुए हैं। सबने किये हैं पर ये हिंसा तो सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ थी। मुकदमे वापसी का यह निर्णय समाज के ताने-बाने के तोड़ने वाला हो सकता है।

सोचिये, आप क्या कर रहे हैं ? आप सरकार में 15 साल बाद लौटे है पर नये नहीं है। आगामी चुनाव और वर्तमान कुर्सी मोह से ऊपर उठकर सोचिये।

 


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