पंत प्रधान का अरण्य रोदन, देश को ये हथकंडे भारी पड़ने वाले हैं

राजनीति, खरी-खरी            Dec 12, 2017


राकेश अचल।
गुजरात विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अरण्य रोदन को सुन कर मेरा कलेजा मुंह को आ रहा है। मोदी जी देश के पंत प्रधान हैं और पूरे देश की शान हैं लेकिन  कांग्रेस पर उनके आरोप सुनकर मुझे रोना भी आया और हंसी भी आयी। मुमकिन है मेरे जैसा हाल दूसरे भारतवासियों का भी हुआ हो,क्योंकि मोदी जी जो आरोप लगा रहे हैं उसे सुनकर अनाड़ी से अनाड़ी भी वो ही सब करेगा,जो मैंने किया ,यानी खुश भी हुआ और दुखी भी।

प्रधानमंत्री जी गुजरात में भाजपा की आसन्न हार से बेहद आतंकित दिखाई दे रहे हैं, इसी कारण उन्होंने पहले कांग्रेस के एक वाचाल नेता मणिशंकर अय्यर के 'नीच'शब्द के बहाने लत्ते का सांप बनाया और उसे अपनी जाती और गुजरात का अपमान बताने की कोशिश की। फिर कांग्रेस पर आरोप लगा दिया कि उसके नेताओं ने अहमद पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाने के लिए पाकिस्तान के राजनायिकों और अन्य अधिकारियों के साथ खुफिया बैठक की।

कांग्रेस पर ये आरोप लगाने से पहले प्रधानमंत्री जी को अपने विदेशमंत्री और विदेश सचिव के साथ केंद्रीय गृहमंत्री की छुट्टी कर देना चाहिए थी। क्योंकि दोनों ही इस महत्वपूर्ण सूचना से अनजान रहे और बात तब सामने आयी जब बैठक हो गयी। प्रधानमंत्री जी अगर ऐसा नहीं कर सकते तो उन्हें खुद ही पदत्याग कर अपनी नाकामी को मान लेना चाहिए कि उनके रहते कांग्रेस इतनी बड़ी साजिश कर पायी?

देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली बड़ी ही दयनीय आवाज में कांग्रेस से सच बताने की बात कहते सुनाई दिए। मैं अगर कांग्रेसी होता [जो मै नहीं हूँ]तो सबसे पहले पूछता कि जब हमारे पंत प्रधान ने देश को बताये बिना पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की भतीजी की शादी में शिरकत के बहाने कूटनीति का मुजाहिरा किया था तब तो किसी को उन्होंने हकीकत नहीं बताई। वे देश और संसद को बताये बिना एक बार नहीं दो बार पाकिस्तान गए तब तो किसी ने उनसे सवाल नहीं किये ,किये भी तो किसी ने उन सवालों का जबाब नहीं दिया,फिर आज क्यों सब परेशान हैं ?

पूरा देश और गुजरात जानता है कि ये सब गुजरात में आसन्न पराजय की हताशा को देखते हुए दूस्सरे चरण के मतदान में ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है। राजनीति में ऐसे प्रयास निंदनीय होते हैं लेकिन कोई क्या करे किये जाते हैं,किये जा रहे हैं। वोट पाने के लिए जब विकास का नारा थोथा साबित होने लगता है तब ऐसी ही बातों का सहारा लेना पड़ता है लेकिन इन सबसे देश की दुनिया में क्या छवि बनती है ये भी सोचा जाना चाहिए ?

जैसा मैंने पहले कहा कि कांग्रेस या भाजपा से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। किन्तु एक भारतीय और एक पत्रकार होने के नाते मेरा अपना अनुभव है कि देश पर सबसे ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस जिस पाकिस्तान के दो टुकड़े करा सकती है वो कांग्रेस एक छोटा सा सूबा जीतने के लिए पाकिस्तान की इमदाद किसी भी सूरत में नहीं ले सकती और अगर कांग्रेस ने ऐसा किया है तो उसे भी सजा भुगतना होगी लेकिन।

यदि प्रधानमंत्री जी के आरोपों में दम है तो उन्हें तत्काल उन सभी कांग्रेस नेताओं के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा कायम कराकर कानूनी कार्रवाई करना चाहिए, पूर्व में भाजपा के लिए चुनौती बने हार्दिक पटेल के खिलाफ इससे कम गम्भ्भीर आरोपों पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा कायम किया जा चुका है।

जनता को मूर्ख बनाने के लिए बीते पचास साल में कांग्रेस ने न जाने कितने तरह के नारे दिए।
ध्रुवीकरण के बजाय तुष्टिकरण की नीति अपनाई जिसके चलते उसके हाथों में लंबे अरसे तक सत्ता रही लेकिन जब ये सरे प्रयास खोखले साबित हुए तो उसे सत्ता से हाथ भी धोना पड़ा।

भाजपा के साथ भी यही सब होने वाला है क्योंकि भाजपा का नेतृत्व आशातीत सफलता न मिलने से बौखलाहट में वो सब कर रहा है जिसकी अपेक्षा भाजपा से नहीं की जाती। क्योंकि भाजपा चाल,चरित्र और चेहरे के मामले में खुद को कांग्रेस से अलहदा बताती आ रही है लेकिन अब उसकी सूरत कांग्रेस से बहुत कुछ मिलने-जुलने लगी है।

गुजरात में कोई हारे,कोई जीते इससे बहुत कुछ क्रांति नहीं होने वाली लेकिन इस चुनाव के लिए जो हथकंडे अपनाये जा रहे हैं वे देश के भविष्य और लोकतंत्र के लिए बहुत भारी पड़ने वाले हैं। देश और गुजरात की जनता को ये हकीकत समझना चाहिए।

 


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