उफ्फ शिव..उफ्फ मोशा..उफ्फ सियायत!

राजनीति, प्रदेश लार्इव            May 05, 2018


आशीष चौबे।
मप्र में आजकल अटकलें जवां हैं तो सियासी गलियारों में खूब उछलकूद मची है। एक कार्यक्रम के दौरान खुद शिवराज ने मुख्यमंत्री की कुर्सी को अस्थाई बताते हुए कहा कि 'मैं चलता हूँ...इस कुर्सी पर कोई भी बैठ सकता है'...।

कुछ देर बाद ही शिव ने सफाई दी कि यह महज मज़ाक था। वाकई ..मज़ाक ही था। शिवराज काफी धाकड़ नेता है। जानते हैं..कि कब,कैसे और कितना मज़ाक किया जाना चाहिए...। शिवराज अब मज़ाक कर रहें है तो दूसरी ओर कर्नाटक चुनाव की व्यस्तता के बावजूद शाह मप्र को अपना अमूल्य समय दे रहें हैं।

कयास - कवायद अपनी जगह लेकिन कुछ तो है जो आकार ले रहा है..
सोशल मीडिया वीरों ने तत्काल मोर्चा सम्हालते हुए नया मुख्यमंत्री का नाम भी तय कर दिया। सिर्फ इतना ही नही बल्कि उपमुख्यमंत्री भी पैदा कर दिए..जय हो..।

तय है कि न तो चुनाव से पहले शिवराज की विदाई होगी और न ही भाजपा उपमुख्यमंत्री जैसा कोई शगूफा छोड़ेगी ।

लेकिन कुछ तो है जो शिव को परेशान कर रहा है ? कुछ तो है जो बार बार अटकलों को जन्म दे रहा है ? कुछ तो है जो भाजपा के नेता शिव से एक अनकही दूरी बना रहे है ? कुछ तो है जो अफसर अब शिव को हल्के में ले रहे हैं?

कुछ तो है जो टिकिट की चाहत रखने वालों के कदम श्यामला हिल्स की ओर नही?

दरअसल शिवराज का ठिकाना आने वाले नवंबर तक श्यामला हिल्स ही होगा लेकिन अटकलों के बीच जो बदलाव हो सकता है वो है 'शक्ति केंद्र' का।

भारी व्यस्तता के बीच शाह का भोपाल दौरा और पार्टी नेताओं - कार्यकर्ताओं से रूबरू होना साफ करता है कि अब मप्र भाजपा से जुड़े फैसले श्यामला हिल्स नही बल्कि मोशा दरबार में होंगे ।

कुछ रणनीति शिवराज जैसी ही है। मप्र में प्रदेश अध्यक्ष से लेकर प्रदेश प्रभारी कोई भी हो..पॉवर सेंटर शिव होते थे लेकिन अब यही अंदाज शाह का होगा। सम्भव है कि अब छोटे से लेकर हर बड़े फैसले दिल्ली दरबार में हो...।

कुर्सी नहीं जायेगी लेकिन ताकत कम होने का शिव अहसास कर चुके हैं। यही अहसास है जो मज़ाक के बहाने उबल कर बाहर आ रहा है । चेहरे पर विश्वास ढुलक चला है। खैर...सियासत है...कभी दो कदम आगे तो कभी तीन कदम पीछे...

शिव की भूमिका सीमित हो सकती है ...भाषण और दौरों तक। मोदी और शाह का जलवा कायम होने लगा है ...। मोशा कोई रिस्क नही लेना चाहते तभी सारी व्यस्तताओं के बीच एक नज़र मप्र पर टिकी है ...।

शिव भी शिव है...अपना राज़ इतनी आसानी न छोड़ने वाले..तो देखते जाइये..."शिव,मोशा और शक्ति केंद्र की जंग'
उफ्फ शिव..उफ्फ मोशा..उफ्फ सियायत

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह आलेख उनके फेसबुक वॉल से लिया गया है।

 


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