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भोपाल गैंगरेप के स्थगन ग्राह्यता पर चर्चा में पक्ष-विपक्ष रहे आमने-सामने

प्रदेश लार्इव            Dec 01, 2017


मल्हार मीडिया भोपाल।
मध्यप्रदेश विधानसभा में आज शून्यकाल के बाद भोपाल गैंगरेप कांड पर आए स्थगन प्रस्ताव की ग्राह्यता पर चर्चा हुई। इसकी शुरूआत कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह ने की। उन्होंने कहा कि एनसीआरबी के आंकड़ों में प्रदेश अपराधों के मामले में दूसरे नंबर पर है पर यह चिंताजनक इसलिए है क्योंकि यूपी की जनसंख्या एमपी से बहुत ज्यादा है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में पिछले कुछ महीनों से बलात्कार के मामलों की बाढ़ सी आ गई है। पुलिस इन घटनाओं पर रोक लगाने में नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराधियों पर प्रभावी कार्यवाही न होने से अपराधियों के हौंसले बुलंद हैं।

उन्होंने कहा कि जब तक राजनीतिक हस्तक्षेप से पुलिस अधिकारियों की पोस्टिंग होती रहेगी, स्थिति ऐसी ही रहेगी। उन्होंने कहा कि पैट्रोलिंग की पुलिस की पूरी व्यवस्था ठप पड़ी है। उन्होंने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक पर भी अपने अमले पर कन्ट्रोल न होने की बात कही। इस पर बाबूलाल गौर ने आपत्ति ली और कहा कि किसी की कुर्सी पर आरोप लगाना ठीक नही है।

गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने विपक्षी सदस्यों से अनुरोध किया कि चर्चा के दौरान वे सिर्फ आरोप न लगाएं, आकड़े मेरे पास भी हैं। चर्चा में सुझाव दें, ताकि उन पर अमल कर घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि भोपाल में गैंगरेप की घटना के बाद मेडीकल रिपोर्ट में लापरवाही पर दो डाक्टर निलंबित किए गए है।

तीन टीआई, दो सब इंस्पेक्टर भी निलंबित कर एक सीएसपी को हटाया गया है। उन्होंने कहा कि पीएचक्यू के द्वारा एक लाख से ज्यादा छात्राओं का आत्मरक्षा का निशुल्क प्रशिक्षण भी दिलाया गया है। इसके अलावा निर्भया टीम को स्कूल और कालेजों के आसपास पैट्रोलिंग करने के निर्देश है। सात लाख से ज्यादा महिलाओं को जनसंवाद के माध्यम से जागरूक किया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर हर सोमवार को समीक्षा बैठक ली जा रही है।

गृह मंत्री बोले, अपराधों पर अंकुश लगा रही सरकार
एनसीबीआर की रिपोर्ट में बलात्कार के मामले में प्रदेश के अव्वल रहने के सवाल पर गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार अपराधों पर अंकुश लगाने के हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गंभीर अपराध कम हुए हैं। इस संबंध में विपक्ष के आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि हम इसे लेकर सदन में चर्चा कराने को भी तैयार हैं।

राज्य विधानसभा में महिलाओं के खिलाफ अपराध पर विपक्ष द्वारा लाये गए स्थगन प्रस्ताव पर गृहमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह ने आज सरकार और पुलिस पर विपक्षी सदस्यों के आरोपों को तथ्य और आंकड़ों के साथ जवाब दिया।

सदन में भोपाल में हुई गैंगरेप की घटना समेत रेप एवं गैंगरेप के अपराधों में मध्यप्रदेश के अव्वल होने के आरोप पर गृहमंत्री श्री सिंह ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान वर्ष 1993 से 2003 तक सिर्फ 1996 एवं 1998 में मध्यप्रदेश बलात्कार एवं गैंगरेप के मामलों में दूसरे पायदान पर रहा।

अन्यथा 1993 से 2003 तक मध्यप्रदेश देश में बलात्कार एवं गैंगरेप में पहले नंबर पर रहा है। श्री सिंह ने कहा कि बलात्कार एवं गैंगरेप एक सामाजिक अपराध हैं। इससे हमें सामूहिक रूप से मिलकर लड़ना उन्होंने कहा कि महिला एवं बालिकाओं के प्रति सदैव संवेदनशील रहने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के प्रयासों से बलात्कार एवं सामूहिक दुष्कृत्य जैसी घटनाओं को अंजाम देने वाले आरोपियों को फांसी जैसे कड़े प्रावधान के दायरे में ला रहे हैं।

उन्होंने कहा कि दुष्कृत्य के मामले में भले ही आंकड़ों से मध्यप्रदेश नंबर वन पर हो लेकिन यह भी सही है कि हमारे प्रदेश में महिला अपराधों में कमी आई है और हम गंभीर महिला अपराधों में 90 फीसदी तक मामलों में आरोपियों को सजा दिलाते हैं।

इसके पहले श्री सिंह ने कहा कि दुष्कृत्य एवं सामाहिक दुष्कृत्य जैसे मामलों से सभी को पीड़ा होती है और ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके, यह हम सभी की सकारात्मक सोच होनी चाहिए। उन्होंने सभी सदस्यों से भावनात्मक अपील की कि वे ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए उचित सुझाव दें ताकि सरकार उस पर अमल कर सके। महज घटनाओं का वर्णन करने से पीड़िता को भी भावनात्मक रूप से ठेस पहुंचती है।

 



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