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मप्र - वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अस्पतालों, जेलों से जुड़ेंगे न्यायालय

प्रदेश लार्इव            Dec 07, 2017


मल्हार मीडिया ब्यूरो।

मध्य प्रदेश के तमाम जिला न्यायालयों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंगके माध्यम से जेल और अस्पतालों से जोड़े जाने का अभियान जारी है। इस पहल से बंदियों की न्यायालयों में उपस्थिति दर्ज कराने के लिए जेल से बाहर नहीं जाना होगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ही उनके बयान दर्ज हो सकेंगे। आधिकारिक तौर पर बुधवार को दी गई जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता के निर्देशन में प्रदेश के उच्च न्यायालय के साथ-साथ अधीनस्थ न्यायालयों को भी हाईटेक बनाए जाने की प्रक्रिया आरंभ की गई है।

ब्योरे के मुताबिक, जिला न्यायालयों को जेलों एवं अस्पतालों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जोड़े जाने की भी पहल की गई है और यह कार्य प्रगति पर है। इस पहल से बंदियों को न्यायालयों में उपस्थित होकर बयान दर्ज कराने की जरूरत नहीं होगी।

पायलट परियोजना के तहत जिला न्यायालय जबलपुर और इंदौर में अभिलेखों के डिजिटलाईजेशन का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। अब तक एक लाख 22 हजार फाइलों के 68 लाख 20 हजार पृष्ठों का डिजिटलाईजेशन किया जा चुका है। शेष समस्त अधीनस्थ न्यायालयों के निराकृत एवं लंबित प्रकरणों के डिजिटलाईजेशन की प्रक्रिया भी प्रारंभ की गई है। सुरक्षा की दृष्टि से जिला व तहसील न्यायालयों में सीसीटीवी कैमरा सिस्टम लगाए जाने की योजना भी शुरू की गई है।

दूरस्थ स्थानों में स्थापित न्यायालयों के लिए आरएफ कनेक्टिविटी प्रदान की गई है ताकि उच्च न्यायालय से कनेक्शन स्थापित हो और कार्य में गति आए। प्रत्येक जिला एवं तहसील न्यायालय को अत्याधुनिक टच स्क्रीन इंफॉर्मेशन कियोस्क मशीनें प्रदान की जा रही हैं।



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