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मानसिक स्वास्थ्य को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की जरूरत:डॉ सत्यकांत त्रिवेदी

प्रदेश लार्इव            Oct 11, 2018


मल्हार मीडिया भोपाल।
14 से 16 वर्ष की आयु में लगभग 50 प्रतिशत मानसिक रोगों की शुरुआत होती है ।अगर इस उम्र से ही मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाए तो आगे मानसिक रोगों के होने की संभावना काफी कम हो सकती है।

यह बात बंसल अस्पताल के कंसलटेंट न्यूरोसाइकेट्रिस्ट डॉ सत्यकांत त्रिवेदी ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर दिल्ली पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यशाला में कही।

लगातार मन का दुखी रहना,चिड़चिड़ापन,काम में मन लगना, नकारात्मक विचार आना,बार बार हाथ धुलना,ताले चेक करना,अकेले बातें करना, शक करना, नशे की लत इत्यादि मानसिक रोगों के सामान्य लक्षण हैं।

ऐसे लक्षण आने पर मनोचिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।सभी मानसिक रोगों का प्रभावी इलाज़ संभव है।

अगर आप मानसिक रूप से परेशान हैं तो अपनी माता पिता और मित्रों से जरूर बात करें और उनसे अपनी समस्या को साझा करें। आपका अच्छा मानसिक स्वास्थ्य आपकी जीवन की गुणवत्ता निर्धारित करता है।

अब समय आ गया है कि सरकार मानसिक स्वास्थ्य को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करे ताकि इन रोगों के प्रति जागरूकता बढ़े और वैज्ञानिक दृष्टिकोण इन रोगों के प्रति कलंक को खत्म कर सके।

 



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