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खंडवा में भाजपा का असंतोष,असमन्वय रोकेगा विजयरथ?

प्रदेश लार्इव            Jul 11, 2018


खण्डवा से संजय चौबे।
मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में भाजपा की दिन पर दिन साख तेजी से गिरती जा रही है। गुटबाजी, उठापटक, वर्चस्व की गलाकाट स्पर्धा के चलते जहाँ पार्टी का अनुशासन तार-तार हो चला है वहीं समन्वय भी भी असमन्वय में बदलने लगा है।

लंबे समय से कार्यकर्ताओ में पनप रहा असंतोष संगठन की एकता के लिए खतरा बनते जा रहा हैं। इसके चलते भाजपा का मिशन 2018 खण्डवा जिले में खतरे में नजर आ रहा है।

सूबे में बीते 15 सालों से सत्ता का परम सुख भोग रही भाजपा 16 वे साल की दहलीज पर बहकती नजर आ रही है। सत्ता व संगठन के बीच खींची गई लकीर दिनोदिन गहराती नजर आ रही है।

चौपाल से भोपाल तक भाजपा को मतदाताओं ने चुनावी वादों व संकल्पों को पूरा करने का भरपूर मौका दिया । लेकिन नीति आयोग के मानदंड पर खण्डवा जिला खरा नहीं उतरा। उसके दामन पर आखिर पिछड़े का दाग लग ही गया।

जिले में केंद्र व प्रदेश सरकार की अरबों रुपयों बजट वाली विभन्न विभागों की कल्यणकारी योजनाए आखिर किसका और कितना कल्याण कर रही हैं यह उच्च स्तरीय जांच का विषय बन गया है। इन योजनाओं की निगरानी करने में भाजपा का सत्ता व संगठन दोनों हो फेल नजर आ रहा है।

केंद्र व प्रदेश की सरकारें जिन योजनाओं का दिनरात ढोल पीटकर अपनी इमेज चमकाने में जुटी हुई हैं उसकी जमीनी हकीकत उनकी पोल खोल रही है।

बड़ी तादाद में जिले के आम हितग्राहियों को उन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया है जितना ढिंढोरा पीटा जा रहा है। इसके चलते आमलोगों में सत्ता के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। सियासी गलियारों में माना जारहा की इसका नुकसान भाजपा को भोगना पड़ सकता है।

पार्टी के कार्यक्रमों में संगठन द्वारा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को दिए गए लक्ष्य गुटबाजी की बलि चढ़ते नजर आ रहे हैं। केंद्र व प्रदेश सरकारें किसानों की नाराजगी दूर करने के लिए अनेक घोषणाएं व कार्यक्रम आयोजित कर रही है लेकिन इनमें सम्मानजनक भीड़ भी भाजपा नही जुटा पा रही है।

अनेक कार्यक्रमों में गिनती भर दर्शकों व श्रोताओं के चलते भाजपा की भारी किरकिरी के सबब बन गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के कार्यक्रमो के लाइव प्रसारण में भी सम्मानजनक दर्शक व श्रोताओं को जुटाने में भाजपाजन नाकाम रहे हैं।

यह भी भाजपा के प्रदेश नेतृत्व के लिए जहां आंखे खोलने वाला है वहीं उसके विजयी मंसूबों पर पानी फेरने वाला भी साबित हो सकता है।

जिले में चुनावी सुगबुगाहट से ज्यादा गुटबाजी , उठापटक , वर्चस्व के लिए गलाकाट स्पर्धा के नजारे व चर्चे ज्यादा है। जो जिले की सरहदों से निकल कर भोपाल व दिल्ली तक पहुंचाए जा चुके हैं। जिले की चारों विधानसभा में भाजपा का कब्जा है।

उन्हें एक बार फिर कुछ माह बाद चुनावी समर में उतारना है। जिले की हरसूद विधानसभा को छोड़कर खण्डवा , मांधाता , पंधाना में वर्तमान भाजपा विधायकों का विरोध खुद भाजपा के गुट कर रहे हैं।

तीनो विधानसभा में चेहरा बदलने के लिए दावेदार अनुशासन की सीमाएं लांघने के लिए उतावले दिखाए दे रहे हैं।

खण्डवा में हाल ही में समन्वय के लिए आए प्रदेश महामंत्री विष्णु दत्त शर्मा के सामने विधायक देवेंद्र वर्मा के विरोधी गुट ने जमकर नारेबाजी की। उन्होंने बंद कमरे में चेहरा बदलने की भी पुरजोर मांग की।

इसके अलावा लम्बे समय से श्री वर्मा के खिलाफ विरोधी गुट लामबंद हो कर गतिविधि चलाए हुए हैं।

इसी तरह खण्डवा महापौर सुभाष कोठारी , भाजपा जिलाध्यक्ष हरीश कोटवाले व विधायक देवेंद्र वर्मा त्रिकोण साबित हो रहे हैं जो कि भाजपा के लिए खतरे की घंटी साबित हो रहा है।

पंधाना व मांधाता में भी चेहरा बदलने की मांग को लेकर दावेदारों ने मौर्चा खोल दिया है। टिकट की चाहत में विधायक विरोधी भोपाल व दिल्ली तक कि परिक्रमा लगा रहे हैं।

पंधाना में विधायक योगिता बोरकर से ज्यादा उनके प्रतिनिधि पति नवल बोरकर की कार्यशैली का ज्यादा विरोध नजर आ रहा है।

पारिवारिक कारणों के चलते श्रीमती बोरकर का चुनाव लड़ने से इनकार भी भाजपा के लिए मुसीबतें खड़ी कर रहा है। उनके विरोधी इसको लेकर जमकर जहाँ लॉबिंग कर रहे हैं वही बोरकर विरोधी माहौल भी बनाने में तेजी से जुटे हुए हैं । यह गुटबाजी भी भाजपा की मंशा पर पानी फेर सकती है।

इसी तरह मांधाता विधानसभा में विधायक लोकेंद्र सिंह तोमर के विरोधी भी उनकी जड़ों में मट्ठा डालने में लगे हुए हैं।

यहां भाजपा से नगरपरिषद मूंदी के अध्यक्ष संतोष राठौर व खण्डवा कृषि मंडी के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के भी टिकट की हसरत लिए कतार में खड़े नजर आ रहे हैं ।

जिले में भाजपा नेताओं की आसमान छूती हसरतों ने इस कदर घमासान मचा दिया है जिसके चलते भाजपा के विजयी रथ पर फिलहाल ब्रेक लगते नजर आ रहे हैं ।

 


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