एक इमरोज खुद के भीतर जिंदा तो करो

वीथिका            Dec 22, 2017


वीरेंद्र भाटिया।
प्रेम औऱ अध्यात्म एक ही बॉयोलोजिकल क्रिया है। इस क्रिया का एक आयाम प्रेम है और दूसरा अध्यात्म है। प्रेम सुलभ अवस्था है जिस पर हर किसी का दावा है। प्रेम अपनो तक और अपने तक सीमित अवस्था है। हर कोई प्रेम में है ऐसा वह जताता है। जब मैं कहता हूं कि इमोशन को प्रेम कहा जाता है तो लोग चिढ़ने लगते हैं कि नही यह तो ईश्वरीय वरदान है लेकिन यही प्रेमिल लोग सड़क पर खून खराबे की हद तक क्रोध दिखाते हैं तब उनका ईश्वर उन्हें हिंसा से रोकने नही आता।

अपने ही पार्टनर से कभी प्रेम तो कभी घृणा प्रदर्शित करते हैं। तब भी ईश्वर नही आता यह कहने कि प्रेम में घृणा कैसे आयी? प्रेम मेरा नही हुआ तो मैं हद दर्जे की नीचता पर उतर जाऊं, ये प्रेम का मौजूदा व्यवहारिक स्वरूप है। पति को पत्नी का सोशल होना बर्दाश्त नही पत्नी को पति का सोशल होना बर्दाश्त नही। स्वीकार लीजिये कि यही प्रेम आपके भीतर भी है। यही प्रेम है। इमोशन का दूसरा नाम प्रेम है और इमोशन का कारक तत्व एक पदार्थ है।

प्रेम की अति अत्यधिक पदार्थ का स्राव करती है। यह स्राव भीतर बहुत कुछ इधर का उधर कर देती है। इस अवस्था मे जो चेतन हुआ वह आध्यात्मिक हो गया और जो बह गया वह बह ही गया।

अध्यात्म दर्द के बाद उपजी स्थिति है। दर्द सभी को है लेकिन जो दर्द के पार हो गया वह आध्यात्मिक हो गया। दर्द दो तरीक़े से जीया जाता है। एक दर्द में दुखी होते हुए और दूसरा दर्द को चेतन देखते हुए। प्रेम से मिले दर्द के बाद भी बहुत लोग एक आयाम से दूसरे आयाम की यात्रा करते जाते हैं। दर्द को चेतन होकर देखने की काबिलियत विकसित करते हैं और दर्द के दुख से निरलेप हो जाते हैं लेकिन संवेदना से भर जाते हैं। संवेदना से भरा ऐसा व्यक्ति किसी का अहित नही सोचता। मुक्तिबोध ने शायद इसे ही संवेदनात्मक ज्ञान कहा है।

प्रेम की बॉयोलोजिकल अवस्था में घिरे सभी लोग प्रेम के ईश्वरीय हो जाने की कल्पना में गड़े हैं जबकि प्रेम और अध्यात्म में ईश्वरीय कुछ है ही नही । बॉयोलोजिकल क्रिया के इस छोर पर प्रेम और घृणा एक साथ खड़े हैं और दूसरे छोर पर घृणा पीछे छूट जाती है। प्रेम से घृणा का निकल जाना ही अध्यात्म है। आप उसे प्रेम कह लें बेशक लेकिन उस अवस्था तक पहुंचिए तो सही। इमरोज हर किसी को पसंद है। ऐसी पसंद आप भी तो हो सकते हैं। एक इमरोज खुद के भीतर जिंदा तो करो मेरे प्रिय।

 


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एक-आयाम-प्रेम-दूसरा-अध्यात्म

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