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जज साहब ! बहुत फटाके फूटे और बहुत से छूटे

वीथिका, खरी-खरी            Oct 23, 2017


राकेश दुबे।
भारत के उच्चतम न्यायलय के जज साहबान भारत का एक न्याय प्रिय नागरिक और जिम्मेदार पत्रकार होने के नाते आपसे क्षमा मांगते हुए निवेदन है कि पटाखों पर दिए आपके फैसले की अवहेलना हुई है। हम भारत के नागरिक अपने दुःख को दबाने के आदी हैं, पर त्यौहार का उत्साह हमसे दबाये नहीं दबता है।

मध्यप्रदेश तो मध्यप्रदेश में दिल्ली में ही खूब फटाके फूटे। मध्यप्रदेश में गृह मंत्री और मुख्यमंत्री ने अन्य लोगों को मध्यप्रदेश आकर दीवाली मनाने का न्योता भी दिया था। मुझे मालूम है आपने प्रतिबन्ध लगाने के इन मुद्दों पर जरुर गौर फरमाया होगा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पटाखों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया, तो राजधानी से करीब 2600 किलोमीटर दूर बसे छोटे से शहर शिवकाशी पर इस फैसले का सीधा असर होगा।

पटाखे, माचिस की तीली और कागज के पोस्टर बनाने के कारोबार का पर्याय बन चुका शिवकासी तो उस दिन स्तब्ध रह गया था। चीन के सस्ते उत्पादों ने पहले ही उसकी कमर तोड़ डाली थी, फिर पिछले साल की नोटबंदी, और इस साल जीएसटी ने उसे जोरदार झटका दिया। जीएसटी में इसे सर्वाधिक 28 प्रतिशत के टैक्स स्लैब में रखा गया है। इस दिवाली में शिवकासी को लगभग १००० करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

कई सारे कामगारों, खासकर बुजुर्गों के आगे नौकरी जाने का खतरा मंडराने लगा है। कुछ पटाखा निर्माता बहादुरी के साथ पर्यावरण के अनुकूल पटाखे (ग्रीन क्रैकर्स) बनाने के दावे कर रहे हैं, तो वहीं इस कारोबार से जुड़े दूसरे तमाम कारोबारी किसी ऐसे रास्ते की तलाश में हैं,जिससे उन्हें अपना कारोबार जारी रखने में मदद मिल सके।

कुल मिलाकर,पटाखा उद्योग में एक अफरा-तफरी का माहौल है, लेकिन साथ ही यह एहसास भी है कि उन्हें अपने इस व्यवसाय को नया रूप देने की जरूरत है। पटाखे बनाने वाली कंपनियों के मुताबिक, यह क्षेत्र तीन लाख प्रत्यक्ष और 10 लाख परोक्ष रोजगार मुहैया कराता है। इससे प्रिंटिंग व पैकेजिंग उद्योग को भी मुनाफा होता है। इसके अलावा, देश भर के लाखों थोक व खुदरा दुकानदारों की आजीविका इस पर आधारित रही है।

इस सब से जरूरी पर्यावरण की रक्षा है। जल थल वायु और ध्वनि प्रदूषण के देश में और भी अनेक कारण हैं। आपके इस फैसले की हिज्जे [अनुवाद ] बहुसंख्यक समुदाय विरोधी के रूप में की गई, इस पर भी देश में दो राय हैं। पर मुद्दा एक है सारे प्रकार के प्रदूषण से मुक्ति।

फैसले के खिलाफ कुछ लोग पुनर्विचार याचिका की जगह न्यायालय भवन के सामने फटाके फोड़ने गये, पर वे फोड़ नहीं सके, पर पूरी दिल्ली में बहुत फटाके फूटे। शिवाकासी के लोगों के मन में भी गुबार के फटाके हैं, इनकी आवाज़ गूंजे इसके पहले पुनर्विचार जरूरी है। इस पर विचार से ज्यादा जरूरी है, भारी भरकम प्रदूषण मंडलों पर नकेल जो अपना काम ठीक से नहीं कर रहे हैं। इस सब में माननीय न्यायलय और फिर पुलिस का समय नष्ट होता है और हिज्जे गलत होने के भी खतरे पैदा होते हैं। सादर।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और प्रतिदिन पत्रिका के संपादक हैं।

 


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