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जूता पहनने से वजन बढ़ता है! मंत्री जी आपको सब फ्री मिलता है!

खरी-खरी            Oct 25, 2017


डॉक्टर अरविन्द जैन।

अस्पताल में मरीज़ ही आते हैं और कभी कभी मरीज़ के साथ उसके नाते रिश्तेदार आते हैं ,अस्पताल में वजन नापने की मशीन रहती हैं। ठण्ड के दिन थे मरीज़ के साथ एक सूटेड बूटेड लड़का भी आया,मरीज़ का वजन नपने के बाद उस नवयुवक ने भी मशीन का उपयोग कर अपना वजन नापा और कहा डॉक्टर मेरा वजन सत्तर किलो हैं इसमें मेरा शूट और जूते का वजन तो एक किलो होगा।

इसका मतलब मेरा वजन एक किलो कम यानि 69 किलो होना चाहिए। डॉक्टर हमेशा मरीज़ों से घिरा रहने से गंभीर रहते हैं पर वे मरीज़ों के माध्यम से अपना मन हल्का करते हैं तो उस नवयुवक से मजाक में बोले है जूते पहनने से वजन बढ़ता हैं और खाने से घटता हैं !

कुछ ऐसे कवि/लेखक /चिंतक /वैज्ञानिक हुए हैं जिनकी अजीबोगरीब आदतें रही हैं। जैसे कोई पिटने के बाद कवितायेँ लिखता है,कोई छेड़खानी के बाद तो कोई शराब पीकर तो कोई नाली में गिरकर, कोई प्रेमिका से दुत्कार खाकर और कोई भूखा रहकर।

हमारे देश में वर्तमान सरकार ने कहा है कि न हम खाएंगे और न खाने देंगें। जब किसी को खाने नहीं मिलेगा तो शौचालय का क्या उपयोग? कहावत है जब आप पाखाना बनवाने में पैसा खरच कर दोगे तो जाओगे कैसे, बिना खाये पिए?

आजकल इसलिए सरकार अन्न फल सब्जी खाने नहीं दे रही कारण किसान को पूरा पैसा नहीं मिल रहा और जनता यानि खरीददार खरीदी नहीं कर पा रहा और सरकार ने खाने को मना किया हैं। हमारे प्रधान मंत्री को कोई चिंता नहीं हैं इसी की चिंता सताती है।


हमारे वित्त मंत्री को पित्तज रोग हो गया है और पहले दिल का ऑपरेशन करा चुके हैं तो वे अभी हृदयहीन हो गए और पित्तज रोग होने से जैसे सावन के अंधे को सब हरा हरा दिखता है वैसे उनको भी दीखता है। या तो उनका चश्मे का नंबर बदल गया या वे जब जिस बात को कहना चाहते हैं वैसा चश्मा पहन लेते हैं।

कल धर्मेंद्र प्रधान केंद्रीय मंत्री ने सही कहा कि नया जूता तीन दिन काटता है और फिर ठीक लगने लगता है। मंत्री लोग तो चमड़े का जूता तो नहीं पहनते और न पसंद करते हैं।हां खाना पसंद करते हैं चांदी सोना का जूता। कारण ये ऐसे जूते हैं इनकी ओर किसी का ध्यान नहीं जाता । क्योंकि गरीब को चप्पल नसीब नहीं होती,माध्यम वर्ग कपडे के जूते पहनता है,अमीर लोग चमड़े के और नेता चांदी या सोने के और मंत्री जी तो सोते समय भी सोने के जूते पहनते हैं कारण बेचारों को देश की चिंता में अपने विभाग की चिंता में और अपने विकास की चिंता में नींद न आने से उन्हें सोना नहीं मिलता तो वे सोना चांदी की चिंता में नहीं सोते।

वैसे हमारे देश में पायल बिछिया सोने की पहनने का चलन बहुत कम है। कहा जाता हैं कि पैरों में सोना नहीं पहना जाता है। पर हमारे मंत्री जी सोने में सोना का जूता पहनते हैं तो शायद वो न काटता हो। क्योंकि उनको सचिव,सेवक के माध्यम से चांदी सोने के जूते मिल जाते हैं। इन जूतों के साथ यह दुःख है कि ये बहु उपयोगी होते हैं पर उपयोगी नहीं होते जितने चमड़े के होते हैं।

आजकल पंप शू पहनने का चलन बढ़ गया है। कौन बंध बांधे और कसे। बिना बंध वाले जूते पहनने में सरल और पहनाने में सरल। मंत्री जी ने जी एस टी के बारे में कहा हैं यानि लक्ष्मी यानि पैसों के बारे में। मंत्री जी के पास लक्ष्मी जी अपने आप आती हैं इसलिए उन्होंने पेट्रोल आदि को जी एस टी से छूट ले रखी है। ताकि नित्य और प्रत्येक माह उनको सुनियोजित ढंग से सोने के जूते मिल जाते हैं इसलिए उनके कभी तीन दिन नहीं होते.उनकी तो सातो वार /तीसों दिन चांदी ही चांदी हैं।

मंत्री जी कभी आपने खुद के पैसों से पेट्रोल डलवाया है। सब फ्री का मिलता है तो जनता का कष्ट कैसे जानोगे? आपको क्या पता जूता तीन दिन के बाद काटना छोड़ देता है? क्योंकि जब से आप मंत्री बने हैं तो आपको को तो सोने की चमच्च से खाने की आदत हो गयी। जिससे वजन बढ़ता ही है। हां चमड़े के जूते पहनने से वजन बढ़ता है और खाने से घटता है। चमड़े के जूते पहनने वालों की चिंता करें। सिर्फ आंकड़ों से कुछ नहीं होता। कभी कभी अपने पैसों से भी पेट्रोल डलवाया करो,कभी बाजार घूमो चमड़े के जूते नए पहनकर, तब पता चले कि जूता खरीदना कितना महंगा है? काटने का सुख कैसा होता है?

नंगे पाँव कांटे न लगे इसलिए पहले कपडा लपेटा जाता था
फिर राजा के लिए ही चमड़े के जूते बने और पहने अच्छा लगा
जब से राजा मंत्री संत्री को जूते मिले चांदी सोने के
तब से मिले जनता ,गरीब को चमड़े के
जनता उतरन पहनने की आदी हैं
अब तो ब्रांडेड सिर्फ अमीर ही पहनते हैं
वे भी क्या कम हैं चांदी से
खाने की अपेक्षा पहनने में फायदा हैं ।

लेखक से संपर्क 09425006753


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