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भ्रष्टाचार और लालफीताशाही को समर्पित हुआ वृक्षारोपण अभियान:​कांग्रेस

प्रदेश लार्इव, लोकल भोपाल            Jul 10, 2017


मल्हार मीडिया भोपाल
मध्यप्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने गत् 2 जुलाई को नर्मदा किनारे संपन्न बहुप्रचारित ‘वृक्षारोपण’ अभियान में पार्टी के उस आरोप को पुनः दोहराया है कि इसमें 700 करोड़ रूपयों का भ्रष्टाचार हुआ है, जो अब लालफीताशाही को समर्पित हो गया है। मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों, भाजपाईयों, अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा लगाये गये पौधे मात्र खानापूर्ति बनकर सूख गये, उजड़ गये है, उन्हें जानवर खा गये हैं या फिर उन्हें लगाया ही नहीं गया है।
इसका ऑडिट कौन करेगा और इस बड़े भ्रष्टाचार के माध्यम से हुई जन-धन की बर्बादी किससे वसूली जायेगी?

उल्लेखनीय है, जब पौधों को बचाने के लिए रक्षकों की हुई थी नियुक्ति और उन्हें मानदेय का भी था प्रावधान, तब इस दुर्गति और भ्रष्टाचार की जवाबदेही किसकी है? कांग्रेस ने नर्मदा के तटीय क्षेत्रों मंडला, जबलपुर, बड़वाह, कुसमानिया, छिन्दवाड़ा, डिंडौरी आदि में हुए इस कथित ‘‘वृक्षारोपण’’ की कुछ तस्वीरें भी अपने आरोपों की पुष्टि हेतु जारी की हैं।

श्री मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने ‘वृक्षारोपण’ के नाम पर 700 करोड़ रूपयों के इस बड़े संगठित भ्रष्टाचार को लेकर पहले से ही आशंका जाहिर की थी। 6.61 करोड़ पौधों की खरीदी, गड्डे खुदाई, गेती, फावड़े, तगाड़ी, पौधों में पानी देने हेतु खरीदी जाने वाली बाल्टियां, मग, झार, ट्री-गार्ड, काली मिट्टी-खाद, प्रचार-प्रसार आदि अन्य व्यवस्थाओं पर विभिन्न शासकीय मद की संचित निधि से उक्त राशि मात्र कागजों पर ही खर्च हुई है।

उक्त उल्लेखित जिलों में कहीं गड्डे तो खोदे गये, किन्तु उनमें पौधे नहीं रोपे, पौधों की रखवाली नहीं होने से उन्हें जानवर खा गये, अकेले छिन्दवाड़ा जिले के वन विभाग द्वारा वनरोपण के तहत रोपे गये पौधों में बमुश्किल 25 पौधे ही बच सके, गांव के बच्चों ने पेड़-पौधे हटाकर क्रिकेट का मैदान बना लिया, चरवाहों ने ‘वृक्षारोपण’ स्थल को चारागाह बना डाला, बड़वाह में करीब 7 लाख पौधे रोपने का दावा किया गया, जबकि यहां लोक स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री श्री रूस्तमसिंह द्वारा लगाये गये पौधे को पशु खा गये, लापरवाही के वशीभूत पौधारोपण के बाद गड्डों में काली मिट्टी-खाद भी नहीं डाली गई, उमरिया में भी सागोन के पौधे लगाये गये, 25 पौधे भी नहीं बचे। देखरेख के अभाव में पौधे सूखने लगे, सैकड़ों गड्डे आज भी इन क्षेत्रों मंे खाली पड़े हैं और पौधे मवेशियों का निवाला बन गये।

श्री मिश्रा ने कहा कि प्रदेश की संचित निधि से लगभग 700 करोड़ रू. की बर्बादी, दुरूपयोग और इसमें हुए भ्रष्टाचार के माध्यम से वर्ल्ड रिकार्ड बनाने को लेकर मिथ्या आंकड़े प्रचारित करना पूरी तरह से सफेद झूठ और प्रदेश की जनता के साथ एक बहुत बड़ा राजनैतिक-प्रशासनिक धोखा है। सरकार बताये कि अब इस संचित निधि के दुरूपयोग, बर्बादी और भ्रष्टाचार की बलि चढ़ चुकी राशि की वसूली किससे और कैसे की जायेगी?

 



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