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नगरीय प्रशासन मंत्री और सीएम की खींचतान का खामियाजा जनता भुगत रही

राजनीति            Feb 25, 2026


मल्हार मीडिया भोपाल।

मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के आठवें दिन नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला। मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने सरकार की नीतियों और प्रशासनिक विफलताओं के खिलाफ कई गंभीर सवाल उठाए।

  1. किसानों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री की चुप्पी पर सवाल

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, मुख्यमंत्री जी को समझना होगा कि किसानों के मुद्दे भाषणों से नहीं, फैसलों से हल होते हैं। 2008 में 70,000 करोड़ का कर्ज माफ कर कांग्रेस ने किसानों के साथ खड़े होने का प्रमाण दिया था, “जय जवान जय किसान” का नारा भी इसी सोच का प्रतीक है। काले कानूनों के समय भी कांग्रेस किसानों के साथ खड़ी रही, लेकिन आज सरकार विदेशी हितों के साथ खड़ी दिख रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा, यूएस ट्रेड डील के असर से मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में कपास के दाम 11% तक गिर चुके हैं। फिर सोयाबीन, सरसों और अन्य फसलों का क्या होगा? यदि सस्ती आयातित फसलें आएंगी तो स्थानीय किसान कैसे टिकेगा? कृषि प्रधान प्रदेश में किसानों को केवल वादे नहीं, उचित दाम, सुरक्षा और सम्मान चाहिए।

  1. गौशालाओं के हालात और गौ संरक्षण नीति पर सरकार को घेरा

उमंग सिंघार ने गौशालाओं की दयनीय स्थिति पर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा, प्रदेश में गौशालाएँ बनाई गईं, लेकिन महीनों तक अनुदान न मिलने से उनकी स्थिति दयनीय हो चुकी है। यदि सरकार सच में गौ संरक्षण चाहती है तो प्रति गाय 40 रुपये सीधे पशुपालकों को दें और GPS आधारित निगरानी लागू करें।

उन्होंने कहा, गौमाता हमारे लिए सिर्फ एक पशु नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति का प्रतीक हैं। क्या अब गौमाता की सेवा को भी मुनाफे के तराज़ू पर तौल दिया जाएगा? नेता प्रतिपक्ष ने विदेशियों को गौशालाएँ सौंपने की नीति पर भी कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि सरकार को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

  1. नगरीय प्रशासन में मंत्री और मुख्यमंत्री के बीच खींचतान का खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है

उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार में मंत्री और मुख्यमंत्री के बीच खींचतान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, नगरीय प्रशासन को न फ्री हैंड दिया जा रहा है, न ठोस निर्णय हो रहे हैं, और इस कारण से डेढ़ साल से शहरों के मास्टर प्लान अटके पड़े हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहर आज भी स्पष्ट विकास योजना का इंतज़ार कर रहे हैं, जबकि अवैध कॉलोनियों का निर्माण धड़ल्ले से जारी है। क्या इन शहरों की जनता को सुव्यवस्थित विकास का अधिकार नहीं है?

 



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