मल्हार मीडिया भोपाल।
मध्य प्रदेश में रेल यात्रियों के लिए सफर अब जोखिम भरा होता जा रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में रेलवे अपराधों में भयावह वृद्धि दर्ज की गई है।
2022 से 2024 के बीच मप्र में जीआरपी (GRP) द्वारा दर्ज मामलों में करीब 70 प्रतिशत का उछाल आया है, जो यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आंकड़ों पर गौर करें तो 2022 में जहां 7,611 मामले दर्ज थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 12,931 तक पहुंच गई है। इस वृद्धि के साथ मध्य प्रदेश अब रेलवे अपराधों के मामले में देश में दूसरे नंबर पर आ गया है।
देशभर में जीआरपी द्वारा दर्ज कुल 83,699 मामलों में से अकेले 15.4% मामले मध्य प्रदेश के हैं। राज्य में अपराध दर 14.7 दर्ज की गई है, जो चिंताजनक है।
मप्र में दर्ज कुल अपराधों में से लगभग 92 प्रतिशत मामले केवल चोरी के हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चोरी के कुल 11,983 मामले दर्ज हुए, यानी हर दिन औसतन 32 से ज्यादा यात्रियों का सामान चोरी हो रहा है।
इसके अलावा स्नैचिंग के 215 और लूट के 45 मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में चोरी की घटनाएं किसी बड़े और संगठित आपराधिक नेटवर्क की सक्रियता की ओर इशारा करती हैं।
जीआरपी द्वारा दर्ज अपराधों में टॉप-5 राज्य
महाराष्ट्र: 15,699 (पहले नंबर पर)
मध्य प्रदेश: 12,931 (दूसरे नंबर पर)
गुजरात: 8,220 (तीसरे नंबर पर)
बिहार: 6,950 (चौथे नंबर पर)
उत्तर प्रदेश: 6,544 (पांचवें नंबर पर)
'रेल ट्रांजिट कॉरिडोर' है अपराध बढ़ने का मुख्य कारण
मध्य प्रदेश भौगोलिक रूप से देश का सबसे बड़ा रेल ट्रांजिट कॉरिडोर है। उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम को जोड़ने वाले प्रमुख रेल नेटवर्क यहीं से गुजरते हैं। राज्य से प्रतिदिन 650-750 यात्री ट्रेनें और 90
इटारसी, भोपाल, जबलपुर, उज्जैन और ग्वालियर जैसे व्यस्त जंक्शनों पर भारी ट्रैफिक और यात्रियों के दबाव के कारण अपराधियों के लिए वारदातों को अंजाम देना आसान हो जाता है। विशेष रूप से भोपाल और ग्वालियर जैसे स्टेशनों पर प्रीमियम ट्रेनों के अधिक लोड के कारण अपराधी सक्रिय रहते हैं।
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