डिजिटल प्लेटफार्म पर एकसाथ आएँगे म.प्र. के संग्रहालय:राजन

प्रदेश लार्इव            May 18, 2018


मल्हार मीडिया भोपाल।
मध्यप्रदेश के सभी संग्रहालय डिजिटल प्लेटफार्म पर एकसाथ आएँगे। इससे ज्ञान के प्रसार की गति तेज होगी। साथ ही, सरकारी-गैर सरकारी सभी संग्रहालयों की डायरेक्टरी भी बनाई जाएगी। यह घोषणा राज्य के आयुक्त, पुरातत्व एवं संग्रहालय अनुपम राजन ने सप्रे संग्रहालय में आयोजित व्याख्यान में की। व्याख्यान का विषय था ‘समाज में संग्रहालयों की भूमिका और महत्व’।

श्री राजन ने कहा कि संग्रहालय कला और संस्कृति को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। भारत की विरासत अत्यंत समृद्ध है। डिजिटल प्लेटफार्म उपलब्ध होने पर दूर बैठे हुए भी देखने-जानने-समझने की सुविधा संभव हो सकेगी। श्री राजन ने बताया कि मध्यप्रदेश में 488 राज्य संरक्षित स्मारक हैं। पुरातत्व के 58 संग्रहालय हैं। इनके संरक्षण के लिए बजट की कमी तो अनुभव होती है, परंतु प्राथमिकता बनाकर काम करने की कोशिश रहती है। यह हम सबका सामाजिक दायित्व भी है। उन्होंने समकालीन वस्तुओं को भी सहेजकर रखने की जरूरत जतलाई जो कि कुछ काल बाद इतिहास बन जाने वाली हैं।

मुख्य वक्ता डा. सुभाष अत्रे ने विस्तृत व्याख्यान में बताया कि 18वीं शताब्दी में संग्रहालय की अवधारणा विकसित हुई। जिसे 19वीं सदी में आधुनिक रूप मिला। इससे पहले निजी संग्रहों तक ही संग्रह की भावना विद्यमान थी। आपने कहा कि ‘ज्ञान की वृद्धि और प्रसार’ संग्रहालय का मूल ध्येय है। भारत में सर विलियम जोन्स को एशियाटिक सोसायटी की स्थापना और उसी के अंतर्गत इम्पीरियल म्यूजियम कायम करने का श्रेय जाता है। संग्रहालयों के प्रति लोगों को अधिकाधिक आकर्षित करने की जरूरत पर जोर देते हुए डा. अत्रे ने कहा कि इससे जहाँ सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ेगा, वहीं पारस्परिक समझ भी बढ़ेगी।

डा. अत्रे ने कहा कि मनुष्य की जिज्ञासा, संग्रह की प्रवृत्ति और अतीत मुग्धता संग्रहालयों की बुनियाद है। इनका संचालन राज्याश्रय अथवा ट्रस्ट अथवा निजी हाथों में होता है। इनकी बड़ी समस्या रखरखाव तथा संरक्षण के लिए संसाधनों की कमी है। डिजिटाइजेशन से इंटरनेट पर उपलब्धता ज्ञान के प्रसार में सहायक होगी।

इस अवसर पर शोध वृत्ति के धनी श्री राजकुमार गुप्ता ने मध्यप्रांत के क्रिमिनल इंटेलीजेंस गजट की वर्ष 1926 से 1937 तक की प्रतियों की जिल्द सप्रे संग्रहालय को भेंट की। श्री राजन एवं डा. अत्रे ने सहयोग भावना के लिए श्री गुप्ता की सराहना की।

आरंभ में संस्थापक-संयोजक विजयदत्त श्रीधर ने सप्रे संग्रहालय की प्रगति तथा विश्व संग्रहालय दिवस की थीम पर प्रकाष डाला। डा. मंगला अनुजा ने अतिथियों का स्वागत किया। उपाध्यक्ष राकेश दीक्षित ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

इस अवसर पर सर्वश्री कृष्णगोपाल व्यास, चंद्रकान्त नायडू, डा. शिवकुमार अवस्थी, डा. हरप्रसाद शर्मा, डा. के.के. तिवारी, प्रो. कपूरमल जैन, प्रो. मधु गार्गव, शिवअनुराग पटैरया, राकेश दुबे, पवन शर्मा, मनमोहन शर्मा, डा. महेशचन्द्र शर्मा, राजीव लोचन कस्तवार, दीपक राय, कमलकांत अग्रवाल, श्रद्धा चौरसिया, राहुल जैन आदि प्रबुद्ध जन उपस्थित थे। सुबह से ‘खजाने की खोज’ प्रतिस्पर्धा चली।

 



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