
ममता मल्हार।
क्षेत्रीय दल दुश्मन कांग्रेस को मानते हैं मगर भाजपा उन्हें निपटा रही है। दिलचस्प बात ये है कि ज़्यादातर क्षेत्रीय दल कांग्रेस के जमाने में पनपे फले-फूले और शुरुआती दौर में खुद ममता बनर्जी समेत कई की तारीफ संघ के समाचार पत्रों में होती थी।
कुलमिलाकर ये कि राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं। मौकापरस्ती ही डुबाती और उठाती है। जिसे इसे पहचानना और उपयोग करना आ गया वह वर्तमान भाजपा बन जाता है।
जनता पता नहीं किस बात की दुश्मनी पाले रहती है राजनीतिक दल और नेता तो एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं।
ध्यान से देखा जाए तो किसी भी दल के नेता को रोजगार की जरूरत नहीं महंगाई से फर्क नहीं। तमाम सुख-सुविधाएं भोगते हुए वे बस जनता जनता करके उसी के टैक्स पर बेहतरीन जीवन जीते हैं।
नैरेटिव के इस घोर दौर में अब तो जनता के दिमाग में यह भी अच्छे से बैठा दिया गया है कि अकेली सरकार क्या-क्या करे? मतलब सरकारें सिस्टम फुल बरी। जिम्मेदार सिर्फ जनता।
पूरे बंगाल चुनाव में मुझे एक ही बात दिलचस्प लग रही कि ममता बनर्जी जनता को दुख-दर्द देती रहीं मगर 15 साल फिर भी मुख्यमंत्री बनती रहीं चुनाव जीतती रहीं।
जिनने बंगाल में कदम नहीं रखा कभी किसी बंगालवासी से बात तक नहीं की उनकी पहली और आखिरी लाईन बंगाल में बहुत जुल्म हो रहा है। तो चलिए उम्मीद है अब पूरे देश की तरह बंगाल में अमन-शांति कायम होगी। वैसे भाजपा 24×7 चुनावी मोड में रहती है और उसकी चुनावी रणनीति की मैं हमेशा से कायल रही हूं, मगर बंगाल में मामला अलग था।
बंगाल में भाजपा ने चुनाव नहीं लड़ा नाक का सवाल बनाकर अहम की लड़ाई लड़ी। यह चुनाव चुनाव से ज्यादा अहं का सवाल था भाजपा के लिये।
तो फिर साम-दाम-दंड भेद जो भी लगा सबकुछ करके भाजपा ने बंगाल निकाल ही लिया। अब जनता ही जिम्मेदार चाहे उसने वोटिंग में जो किया हो।
Comments