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देश की सायबर जमात और सतर्क रहे

मीडिया            Apr 11, 2022


राकेश दुबे।
देश के तीन बड़े ट्विटर हैंडल बाधित होने के बाद सरकार के सायबर वीर जागे हैं, सरकार जाँच करा रही है।

साइबर सुरक्षा पुख्ता रखने की जरूरत एक बार फिर साबित हुई है, क्योंकि हम सचेत नहीं रहे।

देश की उत्तरप्रदेश सरकार, देश के मौसम विभाग और देश विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के ट्विटर हैंडल तीस घण्टे तक हैक रहे। अब जाँच हो रही है।

जानकार इस कारस्तानी में पड़ोसी देश चीन के हाथ होने का अंदेशा जता रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय सीमा से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक चीन का जिस तरह भारत विरोधी रवैया कायम है, उसे देखते हुए यह सूचना कतई नहीं चौंकाती कि चीन लगातार भारतीय संस्थानों के साथ छेड़खानी में लगा है। वैसे ऐसा पहली बार नहीं हुआ है।

इससे पहले जनवरी और फरवरी में भी चीनी हैकर्स की ओर से देश की पावर ग्रिड घुसपैठ की कोशिश हुई थी।

यह तो अच्छी बात है कि देश ने 2018 से ही अपनी साइबर सुरक्षा को काफी मजबूत कर लिया है और चीन के मनसूबे पूरे नहीं हो पा रहे हैं।

भारत में चीन के रवैये को लेकर रोष है, चीन की अलोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, लेकिन उसे इसकी कतई परवाह नहीं है। उसे तो हर हाल में भारत पर अपनी कूटनीतिक, आर्थिक, सामरिक और तकनीकी बढ़त के प्रचार का चस्का लगा हुआ है।

वह खुद को नकारात्मक हरकतों से भी श्रेष्ठ सिद्ध करना चाहता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा देशों को भारत से दूर और अपनी ओर खींच सके।

ऐसे में, यदि भारत की साइबर सुरक्षा अभेद्य या चाक-चौबंद साबित होती है, तो वास्तव में यही साइबर सुरक्षा श्रेष्ठता चीनी हैकर्स के लये माकूल जवाब है।

सब जानते हैं किसी भी विकासशील देश की पावर ग्रिड के साथ खिलवाड़ या उसे ठप्प करने की साजिश या उसमें सेंध लगाकर किसी भी प्रकार के हमले या मौके का इंतजार करने की रणनीति असभ्यता के साथ-साथ शत्रुता नहीं, तो और क्या है?

एक प्रश्न भी पैदा होता है,चीनी हैकर यदि लद्दाख के आसपास के इलाकों में पावर ग्रिड के इलेक्ट्रिसिटी सिस्टम को हैक करने की कोशिश कर रहे थे, तो क्या चीन सरकार को इसका पता नहीं था?

विडंबना देखिए, चीनी सरकार की जुबान बोलने वाले ग्लोबल टाइम्स ने ऐसी किसी साजिश के सुबूत भी मांग लिए हैं और कहा है कि ऐसी किसी साजिश का लापरवाही बरतते हुए किसी भी प्रकार से सरकार से संबंध नहीं जोड़ना चाहिए।

वैसे यह अच्छी बात है कि चीन सरकार तक भारत की बात पहुंच गई है और उसे भारत की किसी भी प्रकार की सुरक्षा के बाबत दुराग्रह को अपने दिमाग से निकाल देना चाहिए।

ध्यान रहे, पाकिस्तान भी आतंकियों की हर साजिश या हमले के बाद भारत से सुबूत मांगता था, लेकिन उसने सुधार की कोशिशें न के बराबर की हैं, तो उसका खुद का जाल उसे भारी पड़ रहा है। ऐसा कोई और देश न करे, तो बेहतर है।

अब चीन को जिम्मेदार देश की तरह व्यवहार करते हुए भारत के प्रति ओछी मानसिकता या शत्रुता से बचना चाहिए।

दूसरी ओर भारत को पूरी गहराई से सोचना चाहिए और सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध करने चाहिए। अगर चीन पावर ग्रिड, सायबर मामलों में घुसपैठ नहीं कर पा रहा है, तो भारत को खुशी से अभिभूत होने की जरूरत नहीं है।

साइबर दुनिया में रोज नई चाबियां बनती हैं, तो ताले बदलते रहने चाहिए। अपने ताले को दुरुस्त रखने के लिए भारत को हरसंभव प्रयास करने चाहिए और साथ ही, दुनिया के विशेषज्ञ वैधानिक हैकर्स को भी साथ रखना चाहिए, ताकि वे दूर से देखते हुए भी हमारी कमियां बता सकें।

भारत को अमेरिका स्थित साइबर सिक्योरिटी ग्रुप जो चीनी हैकर्स पर नजर रख रहा है, उसकी थोड़ी मदद लेने में कोई परहेज नहीं करना चाहिए।

शोधकर्ताओं के इस समूह ने एक नक्शा भी जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि चीनी हैकरों के निशाने पर कौन-कौन से इलाके हैं।

साइबर सुरक्षा से जुड़ी ऐसी सूचनाएं जुटाते रहना और उन्हें मुहैया कराने वाले तमाम विशेषज्ञों को साथ लेकर चलना समय की मांग है, परन्तु सबसे पहली प्राथमिकता देश की सायबर जमात को सजग रहने की है।

 


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