Breaking News

पीएम मोदी ने चला नया दांव, 43 करोड़ महिलाओं को साधने की तैयारी

राष्ट्रीय            Sep 19, 2023


 मल्हार मीडिया ब्यूरो।

नए संसद भवन में प्रवेश करने के साथ ही पीएम मोदी ने विजयी दांव चल दिया है। एक ऐसा दांव, जिसके माध्यम से भाजपा, 2024 के लोकसभा चुनाव में 43 करोड़ महिलाओं को साधने की तैयारी कर रही है। ये दांव भी ऐसा है, जिसे लेकर विपक्ष भी अपनी खुशी जाहिर कर रहा है।

यानी महिला आरक्षण बिल, यह ऐसा दांव है, जिसमें विपक्षी खेमें के पास नाखुशी का मौका तक नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने लगे हाथ कह दिया कि ये तो उनके ही प्रयासों का नतीजा है।

पार्टी नेता जयराम रमेश ने कहा, कांग्रेस पार्टी लंबे समय से महिला आरक्षण को लागू करने की मांग करती रही है।

गौरतलब है कि गत लोकसभा चुनाव के समय जो मतदाता सूची जारी हुई थी, उसमें महिला वोटरों की संख्या 43.2 करोड़ थी, जबकि 46.8 करोड़ पुरुष मतदाता थे।

17 वीं लोकसभा में देश भर से 78 महिला सांसद जीत कर संसद में पहुंची थी। संसद में महिलाओं की उपस्थिति 14.36 प्रतिशत है। 2014 के लोकसभा चुनाव में 62 महिलाओं ने जीत दर्ज कराई थी।

अगर 1951 की बात करें तो लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व महज पांच प्रतिशत था। साल 2019 में यह प्रतिशत बढ़कर 14 हो गया है। कांग्रेस कार्य समिति ने पहले ही यह मांग की थी कि संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण विधेयक को पारित किया जाना चाहिए।

सबसे पहले राजीव गांधी ने 1989 के दौरान मई में पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया था। वह विधेयक लोकसभा में पारित हो गया था, लेकिन सितंबर 1989 में राज्यसभा में पास नहीं हो सका।

अप्रैल 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक को फिर से पेश किया। दोनों विधेयक पारित हुए और कानून बन गए।

आज पंचायतों और नगर पालिकाओं में 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं। यह संख्या 40 प्रतिशत के आसपास है।

महिलाओं के लिए संसद और राज्यों की विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह संविधान संशोधन विधेयक लाए।

विधेयक 9 मार्च 2010 को राज्यसभा में पारित हुआ। लेकिन लोकसभा में नहीं ले जाया जा सका। 

राज्यसभा में पेश/पारित किए गए विधेयक समाप्त नहीं होते हैं, इसलिए महिला आरक्षण विधेयक अभी भी जीवित है।

कांग्रेस पार्टी पिछले नौ साल से मांग कर रही है कि महिला आरक्षण विधेयक, जो पहले ही राज्यसभा से पारित हो चुका है, उसे लोकसभा से भी पारित कराया जाना चाहिए।आज मंगलवार 19 सितंबर को देश की संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए महिला आरक्षण बिल पारित हो गया है।

इस बिल के लागू होने से मध्य प्रदेश विधानसभा में भी महिलाओं की संख्या में भारी वृद्धि होगी।

भाजपा और कांग्रेस दोनों इस बिल का श्रेय ले रहे हैं, लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा ने चुनावों के कारण यह बिल पेश किया है।

मध्यप्रदेश विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी में 33% आरक्षण से भारी बढ़ोतरी होगी। वर्तमान में, 230 सदस्यीय विधानसभा में केवल 23 महिला विधायक हैं, जो कुल संख्या का 10% से भी कम है। 33% आरक्षण सुनिश्चित हो जाने पर, महिलाओं की संख्या 76 तक पहुंच जाएगी, जो कुल संख्या का लगभग 33% है।

यह वृद्धि महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी, जो लंबे समय से राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रही हैं।

यह मध्यप्रदेश की राजनीति में महिलाओं की आवाज को मजबूत करने और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ाने में मदद करेगा।

हालांकि, भाजपा और कांग्रेस दोनों इस बिल का श्रेय ले रहे हैं। भाजपा का कहना है कि यह उनकी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है, जबकि कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा ने चुनावों के कारण यह बिल पेश किया है।

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शोभा ओझा कहती हैं कि भाजपा ने 2014 के अपने मैनिफेस्टो में महिला आरक्षण बिल लागू करने का वादा किया था, लेकिन ऐसा करने में उन्हें नौ साल लग गए।

उनका आरोप है कि भाजपा ने केवल इसलिए यह बिल पेश किया है क्योंकि उन्हें चुनावों में चुनौती मिल रही है।

चाहे भाजपा या कांग्रेस, इस बिल से मध्यप्रदेश विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी में भारी बढ़ोतरी होगी।

यह महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी और मध्यप्रदेश की राजनीति में महिलाओं की आवाज को मजबूत करने में मदद करेगा।

 



इस खबर को शेयर करें


Comments