मल्हार मीडिया भोपाल।
बैठक द आर्ट हाउस में आज 17 जनवरी को पोलैंड से आयी हुई फिल्म मेकर, लेखिका एवं कथाकार मोनिका क्वास्जिकी एवं मुंबई से आयी प्रसिद्ध भरतनाट्यम कलाकार, कोरियोग्राफर एवं सांस्कृतिक राजदूत अपेक्षा निरंजन के साथ भोपाल के दर्शकों ने काफी रचनात्मक एवं अलग-अलग पहलुओं पर रोचक चर्चा की.
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद टूटे हुए पोलैंड, उसके निर्वासित नागरिक, महिलाओं एवं बच्चों को भारत ने ना केवल शरण प्रदान की थी वरन इन शराणार्थियों को स्थापित करने में भी कई स्तर पर सहायता प्रदान की थी।
कथाकार मोनिका, जिन्होंने कई दशकों तक पोलैंड एवं भारत के इन सम्बन्धों पर शोध किया है, ने गुड महाराजा’ की प्रेरक कहानी को 85 वर्ष पूर्व भारत के जामनगर रियासत के तत्कालीन महाराजा दिग्विजय सिंह से प्रेरित बताया.

जामनगर महाराजा ने द्वितीय विश्वयुद्ध युद्ध में पोलैंड से विस्थापित करीब 1000 बच्चों एवं 4000 महिला, पुरुषों को को गोद लिया था और उन्हें दत्तक कुटुंब मानते हुए उनके आवास, शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा का विशेष जिम्मा उठाते हुए उन्हें एक नया जीवन प्रदान किया था.
जामनगर महाराजा जिन्हें विस्थापित पोलिश नागरिकों एवं बच्चों ने प्यार से बापू सम्बोधन दिया था, आज भी पोलैंड में वहां के नागरिकों द्वारा सम्मान से याद किये जाते हैँ एवं पोलैंड सरकार के विशिष्ठ सम्मान से नवाजे जा चुके हैँ.पोलैंड की राजधानी वोरसव में आपके नाम पर काफी चौराहों और स्मरकों का नामकरण भी कोयन गया है
संवाद का संचालन भोपाल के ही फ्लेमेन्को गिटारिस्ट संजीव श्री द्वारा भारत–पोलैंड के मानवीय और ऐतिहासिक संबंधों पर विचार विमर्श को संचालन किया एवं दर्शकों तथा पोलिश कलाकारों से इंटरएक्टिव discussion को भी स्थापित किया.
कार्यक्रम के अंत में बैठक आर्ट हाउस की फाउंडर मेंबर ध्रुपद गायिका ने कलाकारों एवं दर्शकों को धन्यवाद देते हुए मानवीय सम्बंशो को सम्बल देते ऐसे रचनत्मक एवं सकारात्मक संवादों की महत्ता पर विचार व्यक्त किये.
कार्यक्रम में शहर के युवा पीढ़ी, कला जगत एवं बौद्धिक लेखकों की बड़ी उपस्थिति रही
कार्यक्रम का आयोजन पोलिश इंस्टिट्यूट, न्यू दिल्ली तथा बैठक – द आर्ट हाउस, भोपाल के सहयोग से किया गया था। यह पहल रिपब्लिक ऑफ पोलैंड के संस्कृति एवं राष्ट्रीय धरोहर मंत्रालय और एडम मिकिविच इंस्टीट्यूट के समर्थन से आयोजित किया गया.
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