मल्हार मीडिया ब्यूरो।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उसने सोच-समझकर नीतिगत निर्णय लिया है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों की मौजूदगी उनके प्रभावी कामकाज के लिए आवश्यक है।
अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने दो सितंबर को शीर्ष अदालत द्वारा उन्हें जारी किए गए निर्देश के जवाब में दाखिल एक हलफनामे में यह बात कही है, जिसमें उनसे यह बताने को कहा गया था कि मई 2025 के उसके आदेश के बावजूद पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में आइपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के क्या कारण हैं, जबकि उस आदेश में इन नियुक्तियों को धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया गया था।
गृह मंत्रालय ने इससे पहले कोर्ट को बताया था कि पिछले साल अदालत के फैसले के बाद से कुल 46 आइपीएस को इन बलों में प्रतिनियुक्ति पर लाया गया।
न्यायालय का निर्देश कई सीएपीएफ कैडर अधिकारियों द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें दावा किया गया था कि सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) अधिनियम 2026 उनके करियर में प्रगति को प्रतिबंधित करता रहेगा क्योंकि मंत्रालय न्यायालय के 2025 के फैसले को लागू नहीं कर रहा था।
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