मल्हार मीडिया भोपाल।
धान की फसल बचाने के लिए खराब ट्रांसफार्मर की शिकायत की, लेकिन किसान का आरोप है कि इसके बाद उसी पर बिजली चोरी का केस बना दिया गया। मैहर के एक किसान ने बेला विद्युत वितरण केंद्र के JE पर प्रताड़ना, धमकी और 9 हजार वसूलने के गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग की है।
— किसान का आरोप, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद बनाया बिजली चोरी का केस
— JE पर डर और दबाव में ₹9 हजार लेने का आरोप
— कलेक्टर से निष्पक्ष जांच, सुरक्षा और फसल नुकसान के आकलन की मांग
मध्यप्रदेश के मैहर जिले में बिजली विभाग के एक कनिष्ठ अभियंता के खिलाफ किसान ने कलेक्टर से शिकायत की है। ग्राम झिन्ना, तहसील अमरपाटन निवासी रमेश कुमार चौरसिया ने बेला विद्युत वितरण केंद्र में पदस्थ JE गणेश प्रसाद गुप्ता पर पद के कथित दुरुपयोग, मानसिक प्रताड़ना और अवैध वसूली के आरोप लगाए हैं। किसान ने इन आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
किसान के आवेदन के मुताबिक, 15 जुलाई 2026 को उसके खेत से संबंधित ट्रांसफार्मर खराब हो गया था। बिजली नहीं मिलने के कारण धान की फसल की सिंचाई प्रभावित हो रही थी। किसान का कहना है कि उसने लाइनमैन और संबंधित JE को सूचना दी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
शिकायत के बाद कार्रवाई का आरोप

रमेश कुमार चौरसिया के मुताबिक, 20 जुलाई को उसने JE कार्यालय में लिखित आवेदन दिया। इसके बाद भी ट्रांसफार्मर ठीक नहीं होने पर उसने 20 और 22 जुलाई को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 तथा बिजली शिकायत हेल्पलाइन 1912 पर शिकायत दर्ज कराई।
किसान का आरोप है कि शिकायत करने के कुछ दिन बाद, 25 जुलाई को JE उसके घर पहुंचे और उसके खिलाफ बिजली चोरी से संबंधित विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत प्रकरण बना दिया। किसान ने इसे अपनी शिकायत के बाद की गई प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया है। उसका यह भी आरोप है कि मौके पर उसे पंचनामा या संबंधित दस्तावेज नहीं दिए गए और डिजिटल हस्ताक्षर लिए गए।
₹9 हजार लेने का आरोप, रसीद नहीं मिलने का दावा
किसान ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि बिजली चोरी के प्रकरण का डर दिखाकर उससे कुल ₹9,000 लिए गए। उसके अनुसार, ₹5,000 नकद और ₹4,000 डिजिटल माध्यम से जमा कराए गए। किसान का दावा है कि इस राशि की कोई विभागीय रसीद नहीं दी गई।
उसने यह भी आरोप लगाया कि बाद में संबंधित राशि को उसकी इच्छा के बिना बिजली बिल में समायोजित कर दिया गया। किसान के मुताबिक, वह इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और कथित वसूली के संबंध में कार्रवाई चाहता है। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी और बिजली विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ट्रांसफार्मर की जांच में स्टेट रॉड खराब मिलने का दावा
आवेदन में किसान ने बताया कि 28 जुलाई को उसने सहायक अभियंता (AE) कार्यालय में भी शिकायत की। उसके मुताबिक, 30 जुलाई के आसपास ट्रांसफार्मर की जांच हुई और उसमें पूरा ट्रांसफार्मर जला हुआ मिलने के बजाय स्टेट रॉड खराब होने की बात सामने आई। इसके बाद मरम्मत कर बिजली आपूर्ति चालू की गई।
किसान का आरोप है कि बिजली आपूर्ति बहाल होने के बावजूद उसके खिलाफ दर्ज प्रकरण समाप्त नहीं किया गया। उसने यह भी बताया कि 11 सितंबर को बिजली बिल में ₹29,601 अतिरिक्त जुड़ने की जानकारी मिलने पर उसने हेल्पलाइन से संपर्क किया। इसके बाद जब वह JE कार्यालय पहुंचा तो उसके साथ अभद्रता करने, कनेक्शन काटने और दोबारा केस में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया।
कलेक्टर से 16 मांगें, स्वतंत्र जांच और सुरक्षा पर जोर

रमेश कुमार चौरसिया ने कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, मैहर को आवेदन देकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उसने कहा है कि जांच संबंधित JE या उनके अधीनस्थ कर्मचारियों के बजाय वरिष्ठ अधिकारी अथवा स्वतंत्र जांच अधिकारी से कराई जाए।
किसान ने अपने खिलाफ दर्ज बिजली चोरी के मामले की निष्पक्ष समीक्षा, कथित ₹9,000 की वसूली की जांच, परिवार को सुरक्षा, धान की फसल को हुए संभावित नुकसान का आकलन और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी की है। साथ ही उसने शिकायत पर की गई कार्रवाई की लिखित जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
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