मल्हार मीडिया भोपाल।
मध्यप्रदेश में जल्द ही फील्ड में काम करने वाले पुलिसकर्मियों को रूटीन साप्ताहिक अवकाश मिल सकता है।
आज गुरुवार 8 दिसंबर पुलिस ऑफिसर मेस में आयोजित नववर्ष मिलन समारोह में डिजीटल मीडिया के पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा में डीजीपी कैलाश मकवाना ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि विभाग में फिलहाल कर्मियों की कमी है ,लेकिन जल्द ही नई भर्ती के साथ ही साप्ताहिक अवकाश की शुरुआत की जा सकती है।
गौरतलब है कि कि मध्य प्रदेश पुलिस को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन एवं संवेदनशील पुलिसिंग को सुदृढ़ करने की दिशा में किए गए काम को लेकर ‘प्रथम हार्टफुलनेस चेंज मेकर अवार्ड’ मिल चुका है ,लेकिन इस अवार्ड के इतर तनाव की सबसे बड़ी वजह रूटीन साप्ताहिक अवकाश की मांग लम्बे समय से ठन्डे बस्ते में ही पड़ी हुई है। अब इस तनाव से पुलिस कर्मियों को राहत मिलने की संभावना बढ़ रही है। जल्द ही विभाग में नई भर्तियों के बाद फील्ड में काम कर रही पुलिस को साप्ताहिक अवकाश मिल सकता है।
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने 2014 में एक प्रेस वार्ता में गृहमंत्री रहते पुलिसकर्मियों को महीने में एक अवकाश देने का ऐलान किया था। साल 2016 में तत्कालीन गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने पुलिस कर्मियों को मासिक और फिर साप्ताहिक अवकाश देने की घोषणा की थी। उन्होंने इसके लिए पुलिस एक्ट में बदलाव की बात भी कही थी
तत्कालीन पुलिस महानिदेशक ऋषि शुक्ला ने दिसंबर 2016 को तनाव मुक्ति के लिए स्वयं के साथ ही पत्नी व बच्चों के जन्मदिन, शादी की सालगिरह पर अवकाश देने के निर्देश दिए थे। अक्टूबर 2017 को फिर से उन्होंने आदेश जारी किया है। लेकिन यह कुछ ही जगहों में, कुछ समय ही चल पाया।
साल 2018 में विधानसभा चुनाव से पहले तात्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीकली ऑफ दिए जाने की घोषणा की थी, चुनाव में कांग्रेस की जीत के के बाद मुख्यमंत्री बने कमलनाथ ने डीजीपी को अवकाश नियम बनाने के आदेश दिए। कुछ पुलिसवालों को अवकाश मिलना शुरू भी हुआ था, लेकिन योजना लागू नहीं हो सकी थी। जनवरी 2023 को नवनियुक्त आरक्षकों को नियुक्ति प्रमाण पत्र देते समय तात्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फिर पुलिस को अवकाश देने की बात कही थी।
दरअसल आज मध्यप्रदेश पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन में आयोजित नववर्ष मिलन कार्यक्रम में प्रिंट, डिजिटलए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं जनसंपर्क विभाग के अधिकारी शामिल हुए।
इस दौरान पुलिस महानिदेशक ने सभी पत्रकारों से वन-टू-वन संवाद किया, जिसमें मीडिया और पुलिस के बीच समन्वय, सूचना संप्रेषण की भूमिका तथा जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
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