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हम मीडिया संचालित लोग उसी की तर्ज पर जज बन जाते हैं

मीडिया-संविधान            Nov 21, 2022


वीरेंद्र भाटिया।

तुम तो बड़े स्त्रीवादी बनते हो, श्रद्धा पर कुछ नहीं लिखा गया तुमसे? या कातिल मुसलमान था इसलिए तुम्हारी सेक्युलर सोच आड़े आ गई -इनबॉक्स में किसी ने मुझसे सवाल किया।

उनकी भावना की कद्र करते हुए मैं कहना चाहता हूँ कि इस केस में मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा है !

मीडिया अपनी विश्वसनीयता इतनी खो चुका है कि उसकी कही गयी किसी स्टोरी को जब हम गहनता से समझने की कोशिश करते हैं तो प्याज छीलने जैसा अनुभव मिलता है,  छीलते-छीलते एक गुठली हाथ में आती है बस !

रोज दिन में अनगिनत स्टोरी मीडिया कह रहा है, उसे दरअसल टी आर पी चाहिए या फिर किसी अहम् मुद्दे को छिपाना होता है।

आज ही एक स्टोरी चल रही थी कि आफताब नशे का आदि था, वह गांजा पीता था,  वह श्रद्धा के ऊपर बैठ गया और उसका गला घोंट दिया।

ये बात आपको किसने बताई?  कातिल तो जेल में है!

पुलिस मुख्य जांच बिंदु आपको बताती नहीं  और चालान अभी पेश नहीं हुआ जिसमें पुलिस की पूरी स्टोरी अदालत के सामने रखी जाती है और मीडिया की औकात नहीं बची कि वह अपने स्तर पर कुछ ऑथेंटिक ढूंढ पाए।

मीडिया ने तुक लगाई कि हो सकता है वह सीरियल किलर भी हो, क्योंकि उसका कई लड़कियों से सम्बन्ध था और उनमे से कोई लड़की सामने नहीं आई है।

तुक लगाना आज के समय की पत्रकारिता है।

लड़की के टुकड़े किये,  सर जलाया,  पानी का बिल ज्यादा आया, उसने हजारों लीटर पानी बहाया, केमिकल लाया, जिस दिन क़त्ल हुआ लाश पड़ोस वाले कमरे में पड़ी थी तब दूसरे कमरे में एक और लड़की थी।

फिर मीडिया ने कहा आफताब क़त्ल के बाद श्रद्धा को बाथरूम में ले गया और वहां काटा, यानी दूसरे कमरे वाली बात मिथ्या नजर आने लगी।

लड़की के शव के टुकड़े मिल गए हैं लेकिन वह आरी नहीं मिली जिससे लड़की काटी गई। फिर कहा गया कि अभी टुकड़ो की जांच होनी है तो,  आप और मीडिया मिल कर जांच करने पर क्यों तुले हैं?

शव की जांच तो होने दीजिये कि वह लड़की के हैं भी या नहीं ? मई में फेंके गए लाश के टुकड़े मिल गए हैं जो नश्वर हैं , कौए चील कुत्ते से बच गए और आरी अभी नहीं मिली। 

श्रद्धा बिटिया पर तो सोशल मीडिया ने बहुत कुछ कह दिया है,  हर कोई स्त्री को कहने में पीछे नहीं है।

लिव इन वाली लड़कियां रखैल होती हैं , माता पिता का कहा न मानने वाली लड़कियां चरित्रहीन होती हैं,  माय लाइफ माय डिसिशन वाली लड़कियों का हश्र देख लो।

ये सब बातें समाज की भीतरी सड़ांध को सतह पर ले आई हैं,  लड़की को इतनी आज़ादी नहीं देनी चाहिए, ब्ला-ब्ला। भाई लड़के की आज़ादी वापिस कब लोगे?

 वह ऐसे ही सड़क पर तेजाब लहराता और कमरों मे कतल करता फिरेगा ? और लिव इन में ही कतल होते हैं?

अरेंज्ड मैरिज में तुमने बहुये नहीं जलाई? लड़की को समझाईश देने वालों ने अपने घर की लड़की को जीने दिया है भरपूर?

या उसकी प्रॉपर्टी भी लड़को को दे दी और उनके जीने के रास्ते में भर-भर सामाजिकता खड़ी कर दी ?

और जहाँ तक आफताब के मुस्लिम होने का सवाल है तो सोशल मीडिया को इतना तक पता नहीं चला अभी कि आफताब मुसलमान है या ईसाई या पारसी, वे सब लोग श्रद्धा के केस में जज हैं!

इसी बीच चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से खबर आई है कि फोरेंसिक रिपोर्ट की जांच बताती है कि लड़की के मोबाइल में कोई आपत्तिजनक वीडियो नहीं मिली!
इस केस में भी हम सब जज थे कि लड़की ने 65 लड़कियों के वीडियो बनाये हैं और उसे सोशल मीडिया पर बॉय फ्रेंड के साथ मिलकर बेचा है!

मैं यह नहीं कहा रहा हूँ कि श्रद्धा वाला केस भी कोरा खाली है और खबर झूठी है लेकिन मीडिया का रुदन दरअसल उसी रूप में हमारा रुदन बन जाता है,  हम मीडिया संचालित लोग हैं औऱ मीडिया की तर्ज पर हम खुद जज बन जाते हैं।

वीरेंदर भाटिया

 

 

 



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