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जातिगत जनगणना रोकने की याचिका भाषा के कारण सुप्रीम कोर्ट से खारिज

राष्ट्रीय            Apr 10, 2026


मल्हार मीडिया ब्यूरो।

सु्प्रीम कोर्ट में जाति जनगणना पर रोक लगाने के लिए एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी।

इस पिटीशन में याचिकाकर्ता ने जिस भाषा का उपयोग किया था, उस पर सीजेआई ने जमकर नाराजगी जाहिर करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

दरअसल, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा के लिए याचिकाकर्ता को फटकार लगाई। व्यक्तिगत रूप से पेश हुए याचिकाकर्ता से सीजेआई ने कहा, "आपने अपनी याचिका में बदतमीजी की भाषा लिखी है। आपने अपनी याचिका में अभद्र भाषा लिखी है। आपने ऐसी बदतमीजी की भाषा किससे लिखवाई है।"

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल थे। बेंच ने इस याचिका को खारिज कर दिया। यह याचिका न केवल जाति जनगणना के विरोध में थी, बल्कि इसमें एक संतान वाले परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन देने की नीति बनाने की भी मांग की गई थी।

इससे पहले 2 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में एक अलग PIL पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया गया था, जिसमें 2027 की आम जनगणना में नागरिकों के जाति डेटा को रिकॉर्ड करने, वर्गीकृत करने और सत्यापित करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे।

1931 के बाद पहली ऐसी जनगणना

गौरतलब है कि 2027 की जनगणना देश की आधिकारिक तौर पर 16वीं राष्ट्रीय जनगणना होगी, 1931 के बाद पहली ऐसी जनगणना होगी जिसमें जाति की व्यापक गणना शामिल होगी। यह देश की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी।

 



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