मल्हार मीडिया ब्यूरो।
सुप्रीम कोर्ट में आज सीजेपी प्रोटेस्ट से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जिसमें प्रोटेस्ट के चलते मेट्रो और ट्रेन सेवाओं को बंद रखने के आदेश को चुनौती दी गई थी.
याचिका में आदेश देने वाले अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई करने की मांग की गई थी. जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी.
मोहना की बेंच ने सुनवाई की और केंद्र सरकार को अंतरिम आदेश जारी किया कि जहां कानून व्यवस्था को नुकसान पहुंचने की आशंका है, सिर्फ वहां बैरिकेड लगाए जाएं, बाकी सब जगहों से बैरिकेड हटाए जाए, ताकि आम लोगों को आवाजाही में समस्या न हो.
मेट्रो और ट्रेनों को भी सुचारू रूप से चलाया जाए. इंटरनेट सर्विस को भी बहाल किया जाएगा. मामले में अगली सुनवाई अब मंगलवार को होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना की याचिका और अवैध हिरासत का मामला सुनते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और निर्देश दिया कि केंद्र सरकार हलफनामा दायर करे और बताए कि क्यों न केंद्र के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए? क्या एक ही जगह के सभी मेट्रो स्टेशन बंद किए गए थे?
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है. ट्रेनें-मेट्रो बंद कराने से जुड़े अधिकारियों को भी नोटिस भेजे हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मारे आदेश का उल्लंघन किया गया है. करीब 7000 लोगों को अवैध तरीके से हिरासत में लिया गया. इंटरनेट सड़कों, मेट्रो स्टेशन और ट्रेनों की आवाजाही बंद की गई, लेकिन दिल्ली पुलिस न बैरिकेडिंग कर सकती है, न इंटरनेट को बंद कर सकती है.
बता दें कि वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर पर खुशी जताई और कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करते हैं, क्योंकि आज लोगो को विश्वास हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलेगी.
कपिल सिब्बल ने बेंच से अनुरोध किया था कि एक अंतरिम आदेश पारित किया जाए, जिसमें सभी ट्रेनों को दिल्ली पहुंचने की इजाजत मिले.
धारा 163 सिर्फ 4 किलोमीटर के दायरे में ही लगाई जा सके. धारा 163 वाले इलाके में भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जा सके. चाहे कोई भी स्थिति हो, इंटरनेट सर्विस में कोई बाधा न आए. पत्रकारों को अपना काम करने में असुविधा न हो.
वहीं वकीलों ने भी सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि सरकार को पर्सनल लिबर्टी छीनने का अधिकार नहीं है और हर नागरिक को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है.
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