मल्हार मीडिया ब्यूरो।
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार 3 अप्रैल को आम आदमी पार्टी (आप) पर कथित तौर पर उन्हें राज्यसभा में बोलने से रोकने के लिए तीखा हमला बोला.
एक दिन पहले 2 अप्रैल को आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को सदन में उप-नेता के पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया है. पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि आप ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर कहा है कि चड्ढा को सदन में बोलने के लिए पार्टी की ओर से समय न दिया जाए.
हालांकि, मित्तल ने कहा कि इस तरह के बदलाव पार्टी में नेतृत्व के पदों में होने वाले निरंतर बदलावों की प्रक्रिया का ही एक हिस्सा है.
इसके प्रतिक्रिया में राघव चड्ढा ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा, ‘जब भी मुझे संसद में बोलने का मौका मिलता है, मैं जनता से जुड़े मुद्दों पर बोलता हूं. मैं ऐसे मुद्दे उठाता हूं जिन पर आमतौर पर संसद में बात नहीं होती. क्या जनता के मुद्दों पर बोलना कोई अपराध है? क्या मैंने कुछ गलत किया है?’
उन्होंने आगे कहा, ‘ये सवाल आज मैं इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से कहा है कि राघव चड्ढा के सदन में बोलने पर रोक लगा दी जाए. कोई मुझे बोलने से क्यों रोकेगा? मैं आम आदमी, एयरपोर्ट में मंहगे खाने, जोमैटो, ब्लिंकिट के कर्मचारियों की बात रखी, खाने में मिलावट का मुद्दा उठाया, टोल गेट के लूट से लेकर बैंक चार्ज के लूट तक की बात की, मध्यम वर्ग पर टैक्स के बोझ और कंटेंट क्रिएटर्स पर हो रहे हमलों जैसे तमाम मुद्दे मैंने सदन में उठाए. इन मुद्दों को उठाने से देश के आम आदमी का तो फायदा हुआ है. लेकिन इससे आम आदमी पार्टी को क्या नुकसान हुआ?’
उन्होंने कहा, ‘भला मुझे बोलने से क्यों रोकना चाहेगा? मेरी आवाज को क्यों दबाना चाहेगा?’
उन्हें पद से हटाए जाने के कुछ घंटों बाद और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके कथित मतभेदों की अटकलों के बीच चड्ढा ने सोशल मीडिया का सहारा लिया और संसद के उच्च सदन में दिए गए अपने भाषणों के कुछ अंश पोस्ट किए.
चड्ढा ने वीडियो में कहा, ‘जिन लोगों ने मुझसे बोलने का मेरा अधिकार छीन लिया है, उनके लिए मेरे पास एक संदेश है.’ वीडियो के आखिर में उन्होंने एक शेर पढ़ा: ‘मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है.’
कभी अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी माने जाने वाले चड्ढा के बारे में कहा जा रहा है कि पिछले कुछ समय से आप के नेतृत्व के साथ उनके संबंध अच्छे नहीं चल रहे हैं.
इससे पहले असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले आगामी चुनावों के लिए पार्टी के ‘स्टार प्रचारकों’ की सूची में चड्ढा का नाम शामिल नहीं किया गया था. इसके अलावा, पिछले कई महीनों से पार्टी के भीतर चड्ढा की भूमिका को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं.
आबकारी नीति मामले में दिल्ली की एक अदालत द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य लोगों को सभी आरोपों से बरी किए जाने के बाद भी चड्ढा ने सार्वजनिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी.
2024 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले जब केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया था, तब भी चड्ढा वहां मौजूद नहीं थे, बाद में उन्होंने अपनी इस देरी का कारण लंदन में हुई अपनी आंखों की सर्जरी से उबरने की प्रक्रिया को बताया था.
चड्ढा 2022 में राज्यसभा सांसद बने थे और उनके कार्यकाल के अभी दो साल शेष हैं. वह आप के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रह चुके हैं.
2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में उन्होंने राजेंद्र नगर विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी. चड्ढा को हटाने का यह कदम उनके मुंबई एयरपोर्ट पर ‘उड़ान यात्री कैफ़े’ का दौरा करने के बाद सरकार के इस कैफ़े की तारीफ़ करने के ठीक तीन दिन बाद उठाया गया है.
Comments