वेद मिथक नहीं, हमारी सांस्कृतिक चेतना का आधार

वीथिका            Mar 09, 2026


मल्हार मीडिया भोपाल।

हिन्दी लेखिका संघ की मासिक साहित्यिक गोष्ठी “नारी और हास्य” विषय पर विश्व संवाद केंद्र, शिवाजी नगर में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. संतोष श्रीवास्तव ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय ज्ञान परंपरा और वैदिक साहित्य की व्याख्याता डॉ. आरती दुबे उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम का स्वागत वक्तव्य हिन्दी लेखिका संघ की प्रांताध्यक्ष डॉ. साधना गंगराड़े ने दिया। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज की संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है और महिला लेखिकाएँ आज विभिन्न विषयों पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।

मुख्य अतिथि डॉ. आरती दुबे ने अपने उद्बोधन में कहा कि जब भारतीय परंपरा की चर्चा होती है तो साहित्य के सभी मंच वेदपीठ बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि वैदिक वाङ्मय में नारी की छवि अत्यंत अनुकरणीय है। वेद मिथक नहीं हैं, बल्कि उनका संस्कार और डीएनए आज भी हमारे भीतर विद्यमान है। भारत केवल कृषि प्रधान ही नहीं, बल्कि ऋषि प्रधान देश भी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. संतोष श्रीवास्तव ने सभी लेखिकाओं की रचनाओं की सराहना करते हुए कहा कि नारी सम्मान के क्षेत्र में अभी बहुत कार्य होना शेष है। समाज से बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों का पूरी तरह अंत होना चाहिए तथा विधवा विवाह को भी सामाजिक स्वीकृति मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज भी स्त्री पितृसत्तात्मक ढांचे के बीच अपनी पहचान और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है, इसलिए इन मुद्दों पर निरंतर संवाद आवश्यक है।

इस अवसर पर वरिष्ठ लेखिका श्रीमती शीला श्रीवास्तव के बाल कहानी संग्रह “हौसलों की उड़ान” का विमोचन भी किया गया।

गोष्ठी में हास्य और नारी विषय पर रचनापाठ का क्रम भी अत्यंत सरस और प्रभावी रहा। रचनापाठ करने वाली लेखिकाओं में सुनीता यादव, कल्पना विजयवर्गीय, वंदना गुप्ता, राजकुमारी चौकसे, सीमा शिवेंद्र, अनीता सक्सेना, मनोरमा श्रीवास्तव, डॉ. सीमा अग्रवाल, नीता श्रीवास्तव, प्रेमशीला, वंदना त्रिपाठी, डॉ. रंजना शर्मा, निमिषा गुप्ता, डॉ. नीता खरे, डॉ. नीलिमा रंजन, संध्या पुरी, डॉ. अल्पना वर्मा, संगीता भारद्वाज, डॉ. रेणु श्रीवास्तव, सुनीता शर्मा सिद्धि, बिंदु त्रिपाठी, सीमा अग्रवाल, चित्रा चतुर्वेदी और जया तागड़े प्रमुख रहीं।

कार्यक्रम में डॉ. कुमकुम गुप्ता, सुमीत नायर, कुसुम श्रीवास्तव, उषा चतुर्वेदी, शालिनी खरे, नीना सिंह सोलंकी, वर्षा ढोबले, सुसंस्कृति सिंह, वी.एस. पाराशर, राजेश दुबे और मृदुल त्यागी सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ, जिसे सुनीता शर्मा सिद्धि ने प्रस्तुत किया। संचालन नविता जौहरी ने किया तथा अंत में आभार प्रदर्शन सुधा दुबे ने किया।

 



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