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सब भगवान को ही करना है तो कोविड सेंटर्स क्यों खोले गये

खास खबर            Nov 23, 2020



रजनीश जैन।

बुंदेलखंड मेडीकल कालेज के जूनियर डाक्टरों को कोरोना से ग्रस्त अपने एक साथी डाक्टर की जान बचाने अंततः भगवान की शरण लेनी पड़ी है। परिसर में बने मृत्युंजय महादेव मंदिर में कल डाक्टरों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया।

पंद्रह दिन पहले कोविड मरीजों का इलाज करते हुए खुद कोविड की चपेट में आए संविदा चिकित्सक डा शुभम उपाध्याय यहां से भोपाल के चिरायु हास्पिटल भेजे गये हैं। उनके साथी डाक्टर्स का मानना है कि वहां उनकी हालत गंभीर है और उनकी जान बचाने के लिए ऊंचे व खर्चीले इलाज की जरूरत है।

डा.उमेश पटेल ने बताया कि उनके उपचार में बरती जा रही लापरवाही का प्रमाण यह है कि बार-बार कहने के बाद दस दिनों बाद भी डा शुभम का दोबारा सीटी स्केन नहीं किया गया। उन्हें एयर एंबुलेंस से दिल्ली एम्स में शिफ्ट किए जाने की आवश्यकता है जिस पर शासन प्रशासन निर्णय नहीं ले रहे।

डा शुभम सागर जिले में केसली के एक किसान के बेटे हैं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि वे एयर एंबुलेंस या मंहगे प्राइवेट इलाज का खर्च वहन कर सकें। लिहाजा साथियों की पहल पर सागर शहर के कुछ समाजसवियों ने आगे आकर उपचार के लिए आर्थिक सहयोग किया है। लेकिन शासन का स्वास्थ्य महकमा, मुख्यमंत्री का राहतकोष और कोरोना वारियर फंड क्या कर रहा है?

बताया गया है कि बीएमसी में हुए इलाज में डा शुभम उपाध्याय को लगभग चालीस हजार के छह इंजेक्शन लगाए गये हैं उनका खर्च भी उनसे वसूल कर लिया गया।

डाक्टर्स जब अपने प्राणों की रक्षा के लिए सामूहिक रूप से भगवान भरोसे हो जाएं तो इसका संदेश कई कोणों से विपरीत जाता है। जनता में धारणा बनती है कि मेडिकल कालेज जैसा संस्थान भी भरोसे के काबिल नहीं है।

यदि सब भगवान को ही करना है तो कोविड सेंटर्स क्यों खोले गये है।...क्या जनता मान ले कि कोविड होने पर अस्पताल के बजाए देवालयों की शरण में जाना चाहिए!? बीएमसी के डा पटेल इसके उत्तर में कहते हैं कि कोविड ने समाज की मनोदशा पर भी असर डाला है।

यदि मानसिक राहत मंदिर और भगवान के पास जाकर मिलती है तो वह भी इलाज का ही एक हिस्सा है। अब तक बीएमसी के लगभग 15 चिकित्सक खुद कोविड पाजीटिव हो चुके हैं पर सभी रिकवर हो गये। डॉ शुभम जितनी गंभीर स्थिति में पहुंच गये हैं उससे चिकित्सकों का मनोबल हिल गया है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं यह आलेख उनके फेसबुक वॉल से लिया गया है।


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