बैंकों में सब सशुल्क तो ग्राहक की सेवा क्या है?

खास खबर            Jan 11, 2018


राकेश दुबे।
किसी मित्र ने फिर मुझसे पूछा है कि क्या 20 जनवरी से कुछ ऐसा होने जा रहा है कि किसी बैंक शाखा में जाना आपको भारी पड़ सकता है? जिम्मेदार बैंकर मित्र दबे स्वर में पुष्टि कर रहे हैं कि देश के सभी सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंक शाखाओं में दी जाने वाली उन तमाम सेवाओं के लिए शुल्क वसूलने की तैयारी कर रहे हैं जो अब तक मुफ्त हैं। कुछ सुविधाओं के लिए शुल्क की समीक्षा होगी। इन सुविधाओं में पैसा निकालने, जमा करने, मोबाइल नंबर बदलवाने, केवाईसी, पता बदलवाने,नेट बैंकिंग और चेकबुक के लिए आवेदन करने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

जिस शाखा में आपका खाता है, उससे इतर किसी दूसरी शाखा में जाकर बैंकिंग सेवा लेने पर भी अलग से शुल्क लिया जाएगा। शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी भी लगेगा। यह शुल्क आपके खाते से काट लिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि नए शुल्कों को लेकर आंतरिक आदेश मिल चुके हैं। नाम नहीं बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा, "हम रिजर्व बैंक के दिशा निर्देशों का पालन करते हैं। नियमों के अनुसार संबंधित बैंक का बोर्ड सभी मानकों को जांचकर सेवाओं पर लगाए जाने वाले शुल्क का फैसला लेता है। बोर्ड से मुहर लगने के बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाता है।"

सरकार के इस कदम से देशभर के खाताधारक प्रभावित होंगे। हालांकि बैंकरों ने इस कदम को सही बताया है। उनका कहना है कि खाताधारक अगर अपनी होम ब्रांच के अतिरिक्त किसी अन्य ब्रांच से बैंकिंग सेवाएं लेता है तो शुल्क लगना चाहिए। एक अन्य अधिकारी ने कहा, "इस कदम से ऑनलाइन बैंकिंग को बढ़ावा मिलेगा। समय के साथ-साथ चेक और डिमांड ड्राफ्ट भी अप्रासंगिक हो जाएंगे।" एटीएम और कियोस्क मशीनों से पासबुक अपडेशन और पैसों का लेनदेन अब भी निशुल्क किया जा सकेगा।

कानून और कर क्षेत्र के जानकारों ने इस कदम की निंदा करने के लिए कमर कस ली है। उनका कहना है कि बैंक एकतरफा तरीके से ऐसा फैसला ले रहे हैं, जिससे आम लोगों पर बुरा असर पड़ेगा। जनता पहले ही भारी भरकम करों, कम ब्याज दरों और बढ़ती कीमतों से परेशान है।

सही अर्थों में अब बैंक फायदा कमाने वाले संस्थान बनते जा रहे हैं। बैंकों ने निजी साहूकारों जैसा व्यवहार शुरू कर दिया है, इसलिए उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है । परिपाटी तो यह है कि रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों में संशोधन के बिना बैंक इस तरह खाते से शुल्क के रूप में पैसा काटने जैसे नियम नहीं बना सकते।

सेवाकर से जुड़े लोग विभिन्न शुल्क पर जीएसटी लगाने का समर्थन जरुर करते है पर मुख्य शाखा से इतर किसी शाखा से बैंकिंग सेवा लेने पर शुल्क लेने को गलत बताते हए इसे ब्लैकमेलिंग की संज्ञा दी। जिन सेवाओं पर शुल्क लगने की सूचना है उनमें पैसा जमा करना, पैसा निकालना, केवाईसी,पता बदलवाना, फोन नंबर बदलवाना, नेट बैंकिंग और चेक बुक आवेदन आदि है,तो प्रश्न यह है कि सेवा क्या है ? सब सशुल्क तो ग्राहक की सेवा क्या है? बैंकों को अपनी सुख सुविधा कम करने की भी सोचना चाहिए।

 


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