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आर्ट ऑफ लीविंग ने यमुना खादर को क्षतिग्रस्त किया - एनजीटी

समाचार            Dec 07, 2017


मल्हार मीडिया ब्यूरो।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने गुरुवार को पिछले वर्ष आयोजित तीन दिवसीय विश्व संस्कृति महोत्सव के दौरान यमुना खादर की पारिस्थितिकी को क्षतिग्रस्त करने के लिए श्री श्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लीविग को जिम्मेदार ठहराया और संगठन को मरम्मत कार्य के लिए धनराशि देने के आदेश दिए। एनजीटी के मुख्य न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार ने अपने आदेश में कहा, " हम प्रतिवादी नंबर तीन(आर्ट ऑफ लीविंग) को यमुना खादर को क्षतिग्रस्त करने के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं।"

यह आदेश ऐसे समय दिया गया है जब पर्यावरण विशेषज्ञ पैनल ने 2016 में विश्व संस्कृति महोत्सव के दौरान दिल्ली में यमुना खादर को काफी क्षति पहुंचाने के लिए संगठन पर आरोप लगाया है।

एनजीटी पहले ही क्षति के लिए आर्ट ऑफ लीविंग पर 5 करोड़ का जुर्माना लगा चुकी है और कहा था कि इस धनराशि का प्रयोग यमुना खादर को सही करने में लगाया जाएगा।

एनजीटी प्रमुख ने कहा, "अगर और ज्यादा धनराशि की आवश्यकता होगी तो आर्ट ऑफ लीविंग को और राशि देनी होगी। अगर मरम्मत कार्य में कम राशि खर्च होगी तो जमा की गई पांच करोड़ रुपये की राशि में से बची राशि को लौटा दिया जाएगा।"

हरित न्यायालय ने दिल्ली विकास प्राधिकरण से भी खादर क्षेत्र में मरम्मत कार्य के लिए लगने वाली धनराशि का ताजा मूल्यांकन कर इसमें लगने वाली धनराशि के बारे में बताने के लिए कहा।

पर्यावरविद् इस महोत्सव के आयोजन के लेकर पहले से ही विरोध में थे। इस महोत्सव के दौरान यमुना क्षेत्र में 1,000 एकड़ क्षेत्र का प्रयोग किया गया था जिसमें 35,000 संगीतकार और नर्तकों के लिए सात एकड़ का स्टेज बनाया गया था।

आर्ट ऑफ लीविंग ने यमुना किनारे किसी भी तरह की क्षति से इंकार किया है और आरोप लगाया कि ऐसा षड््यंत्र की वजह से किया जा रहा है।

संगठन ने कहा, "हमलोगों ने कभी भी पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाया है बल्कि वास्तव में कई वर्षो से पर्यावरण संबंधी कार्य करके इसका संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य किया है।"



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