Breaking News

मौसम भी ठीक फिर भी मप्र में मतदान कम, सिर्फ होंशंगाबाद में ज्यादा वोटिंग

मध्यप्रदेश            Apr 26, 2024


मल्हार मीडिया भोपाल।

लोकसभा सीटों पर वोटिंग हुई। शाम 5 बजे तक एमपी की छह सीटों पर 54.83% मतदान दर्ज किया गया। वहीं छत्तीसगढ़ की सीटों पर शाम तक 72.13% वोटिंग रिकॉर्ड की गई। मध्यप्रदेश की सभी 6 सीटों पर वोटिंग परसेंट 2019 के लोकसभा चुनाव से कम रही। सबसे ज्यादा 63.44 परसेंट वोटिंग होशंगाबाद सीट हुई। वहीं छत्तीसगढ़ के कांकेर लोकसभा में सबसे ज्यादा वोट पड़े। दोनों राज्यों में शाम तक वोटिंग परसेंट कम रहने से एक बार फिर राजनीतिक पंडित स्थिति और समीकरणों के विश्लेषण में जुट गए हैं।

मध्यप्रदेश में दूसरे चरण में बुंदेलखंड के टीकमगढ़, दमोह, खजुराहो, सतना, रीवा और मध्य क्षेत्र के होशंगाबाद लोकसभा सीटों पर मतदान हुआ। सुबह से मतदान की स्थिति सामान्य जो दोपहर में कुछ कमजोर हो गई। हालांकि, पहले चरण में मतदान कम रहने की वजह से बीजेपी-कांग्रेस के कार्यकर्ता वोटर्स को पोलिंग बूथ तक लाने में सक्रिय नजर आए। इसके बावजूद मतदान कम रहा। प्रदेश की टीकमगढ़ सीट पर शाम 5 बजे तक 57.19%, दमोह में 53.66%, खजुराहो 52.91%, सतना 57.18%, रीवा 45.02% और होशंगाबाद में 63.44% वोटिंग रेकॉर्ड की गई है। कुछ पोलिंग बूथ पर शाम 6 बजे के बाद भी वोटर्स की कतार लगे रहे। इसके चलते उन्हें टोकन देकर मतदान कराया जा रहा है। जिससे वोटिंग परसेंट कुछ बढ़ने का अनुमान है।

मध्यप्रदेश में पहले और दूसरे फेज में हुए मतदान के आंकड़ों से जहां चुनाव आयोग चिंतित है। वहीं बीजेपी-कांग्रेस में भी खलबली मचने लगी है। हालांकि, नेता वोट परसेंट में गिरावट को लेकर तर्क और दलीलें पेश कर रहे हैं, लेकिन अंदरखाने हालात कुछ और ही हैं। बीजेपी और कांग्रेस का मैनेजमेंट भी वोटर्स की अरुचि को समझ नहीं पा रहा है। बीजेपी इसलिए भी ज्यादा चिंता में दिख रही है। संगठन अपने स्तर पर अलग से पार्टी का वोट परसेंट बढ़ाने का अभियान चला रहा था। पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर 10 फीसदी वोट शेयर बढ़ाने को लेकर बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं को भी सक्रिय किया था, लेकिन बूथों पर हो रहे कुल मतदान ही स्थिति ही साल 2019 से कम रही है।

आमतौर पर लोकसभा चुनाव मई-जून माह में ही होते रहे हैं। मतलब हर बार इस सीजन में वोटर तेज धूप और लू के थपेड़ों के बीच वोट डालने पोलिंग तक जाता रहा है। ऐसे में वोट परसेंट घटने को लेकर तेज गर्मी की सफाई बेमानी है। इस बार तो पिछले चुनाव के मुकाबले मौसम ठंडा है। बार-बार बारिश हो रही है और आसमान भी बादलों से भरा हुआ है। प्रदेश में पहले और दूसरे फेज की वोटिंग के दौरान मौसम ऐसा ही रहा फिर भी वोटर बूथों से गायब रहे। अब राजनीति के जानकार वोटर्स की इस अरुचि की वजह के विश्लेषण में जुटे नजर आ रहे हैं।

 

 



इस खबर को शेयर करें


Comments