फिल्म समीक्षा : युवाओं के लिए वेलेंटाइन पर आया गली ब्वाय

पेज-थ्री            Feb 14, 2019


डाॅ. प्रकाश हिन्दुस्तानी।
गली बॉय फिल्म का गाना है अपना टाइम आएगा, नंगा ही तू आएगा, क्या घंटा लेकर जाएगा। फिल्म देखकर लगता है कि वाकई रणवीर सिंह, आलिया भट्ट और जोया अख्तर का टाइम आया हुआ है।

भारत में भले ही सर्दी, गर्मी और बरसात के मौसम होते हो, फिल्मों के लिए तो वेलेंटाइन्स-डे, दिवाली, क्रिसमस, वेडिंग सीजन और एग्जाम सीजन ही होते है। इसलिए शुक्रवार के पहले भी फिल्में रिलीज हो जाती है।

गली बॉय फिल्म की कहानी तो प्रेरणादायक है ही, निर्देशन भी कमाल का है। स्क्रीप्ट और निर्देशन में जोया अख्तर ने कमाल किया है और रणवीर सिंह तथा आलिया भट्ट ने पूरे जोश से अपनी-अपनी भूमिका निभाई है।

युवकों के लिए बनी फिल्म वेलेंटाइन्स-डे पर रिलीज कर दी गई। फिल्म को अच्छा प्रतिसाद तो मिलना ही था।

हर व्यक्ति को यह जरूर लगता है कि उसका भी वक्त आएगा। योग्य से योग्य और नाकारा से नाकारा आदमी भी यही महसूस करता है। बस, यही बात जोया अख्तर ने पकड़ ली है। तमाम झोल होने के बाद भी कहानी इस तरह गुथी गई है कि दर्शक बंध जाता है।

फिल्म की गति को लेकर कई दर्शकों को शिकायत हो सकती है, लेकिन फिर भी दर्शकों को बांधे रखने वाले डायलॉग अपने उद्देश्य में कामयाब होते है और दर्शक खुशी-खुशी सिनेमाघर से बाहर निकलता है।

फिल्म की कहानी एशिया की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी मानी जाने वाली धारावी में रहने वाले परिवार के आसपास बुनी गई है। झोपड़पट्टी वालों के बारे में जिस तरह की धारणाएं होती है, उन्हें ही पुष्ट किया गया है। आवारागर्दी करते, कार चुराने में सहयोग देते हीरो को रैपर बनने की धून लगती है।

वह कॉलेज में रैप सांग गाते युवा को देखता है, लिखने का शौक उसे रहता ही है (हालांकि वह हिन्दी या मराठी के बजाय रोमन हिन्दी में गाने लिखता है), लेकिन संगीत की समझ उसे नहीं होती। उसे जोड़ीदार मिलता है और वे रैप म्युजिक तैयार करते है।

सोशल मीडिया उन्हें मंच देता है, लेकिन झोपड़पट्टियों में जो होता है, वह उसके घर भी होता रहता है।

फिल्म में कहानी के भीतर कई कहानियां है। एक युवा की महत्वाकांक्षाओं को दबाता परिवार, आर्थिक मजबूरियां, मुस्लिम परिवारों में होने वाले विवाह, झोपड़पट्टी की कठिन जिंदगी, जिसमें अपराध पलते है, डाॅक्टरी की पढ़ाई कर रही मुस्लिम लड़की के विवाह की मजबूरी, संपन्न घरों में होने वाली असामान्य सी बातें, सभी मसाले फिल्म में है।

कई दर्शकों को फिल्म में बार-बार आने वाले रैप सांग झिलाऊ लग सकते हैं। फिल्म में जैसी रैप बेटल दिखाई गई है, वैसी आमतौर पर शायद ही होती हो। पुराने जमाने की कव्वाली की याद दिला देते है, वे गाने।

कुल मिलाकर फिल्म में सारे मसाले बार-बार भूनकर मिला दिए गए हैं। संवाद ऐसे हैं, जो युवा वर्ग की बोलचाल की भाषा है, इसलिए फिल्म में युवा दर्शक तालियां पीटते नजर आते है।

निर्देशक ने घोषणा की है कि यह फिल्म किसी भी सत्य घटना से जुड़ी हुई नहीं है, लेकिन फिर भी संगीत प्रेमी कहते हैं कि यह फिल्म असल जीवन के रैपर नाइजी और डिवाइन की जिंदगी से प्रेरित है। फिल्म के विज्युअल्स काफी अच्छे है और बंबई की झोपड़ीपट्टियों और महानगरीय जीवन को प्रतिनिधित्व देते है।

महानगरों में तो यह फिल्म निश्चित ही पसंद की जाएगी। बर्लिन फिल्म फेस्टीवल में यह फिल्म दिखाई जा चुकी है और उसे लोगों ने पसंद भी किया है। रणवीर सिंह और आलिया भट्ट के अलावा कल्की कोचलिन, विजय राज, सिद्धांत चतुर्वेदी, विजय वर्मा, विजय मौर्य, अमृता सुभाष और नकूल सहदेव आदि कलाकारों ने भी स्वाभाविक अभिनय किया है। फिल्म में रणवीर सिंह के रैप गाने जावेद अख्तर ने लिखे हैं।

मल्हार मीडिया ब्यूरो।

 


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