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गाजी अटैक और नाम शबाना जैसी फिल्मों के ही आगे की कड़ी है राजी

पेज-थ्री            May 11, 2018


डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी।
गाजी अटैक और नाम शबाना जैसी फिल्मों के ही आगे की कड़ी है राजी। कहानी फेविकोल नहीं, देशभक्ति के जोड़ से जुड़ी है। बार-बार ‘ऐ वतन, ऐ वतन आबाद रहे तू’ गाना गूंजता है, जो गुलजार ने लिखा है।

मूल रूप से यह गाना पाकिस्तान आर्मी स्कूल के बच्चों पर फिल्माया गया है। उन बच्चों को गाना सिखाती है आलिया भट्ट, जो भारत से शादी कर पाकिस्तान गई है।

नेवी के रिटायर्ड अधिकारी हरिंदर सिक्का के उपन्यास ‘कॉलिंग सहमत’ पर आधारित यह फिल्म मेघना गुलजार ने निर्देशित की है और इसके निर्माता के तौर पर टाइम्स ऑफ इंडिया के मालिक विनीत जैन का नाम अंत में आता है।

धर्मा प्रोडक्शन्स, जी प्रोडक्शन्स, टाइम्स ऑफ इंडिया समूह जैसी कई कंपनियां इससे जुड़ी हैं। महेश भट्ट और गुलजार का समर्थन है। दोनों अपनी बेटियों के लिए फिल्डिंग कर रहे हैं। फिल्म को इस तरह प्रचारित किया गया है, मानो यह सर्वकालिक महान फिल्म हो।

देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत एक बाप अपनी बेटी को शादी करके पाकिस्तान के एक बड़े सैन्य अधिकारी के घर बहू बनाकर भेज देता है। इसके पहले उसे ट्रेनिंग दिलवाता है कि वह अंडरकवर एजेंट का काम करे।

पाक सेना अधिकारी के घर पर नई-नवेली बहू जासूसी करती है और जासूसी फिल्म में जिस तरह के दृश्य डाले जाते है, वैसे इसमें भी है। सस्पेंस, इमोशन, एक्शन, चालाकी, वतनपरस्ती, जांबाजी, देशप्रेम के संवाद आदि। बीच-बीच में जंग के बारे में भी कहा जाता है कि जंग तो जंग ही होती है, उसमें आदमी की कोई हैसियत नहीं।

आलिया भट्ट ने अपनी क्षमता के अनुसार इस फिल्म में अच्छी एक्टिंग की है। शंकर अहसान लॉय के संगीत वाला गुलजार का गाना ऐ वतन, ऐ वतन अरिजीत ने गाया है।

कश्मीर के खूबसूरत नजारे फिल्म में हैं और अच्छा छायांकन है। 1971 के भारत-पाक युद्ध के पहले का समां बांधने की कोशिश की गई है, जब दोनों देशों की सीमाओं पर तनाव था और भारत बांग्लादेश में मुक्ति सेना का समर्थन कर रहा था।

आईपीएल के दौर में इस फिल्म का आना थोड़ा अटपटा लगता है। क्रिकेट के खुमार में दर्शक देशभक्ति की चाशनी चाट नहीं पाता।

फिल्म में पाकिस्तान की सेना के अधिकारियों को बेहद विनम्र, पारिवारिक और आला दर्जे का सभ्य दर्शाया गया है, लेकिन फिर भी फिल्म को पाकिस्तान में रिलीज करने की अनुमति नहीं मिली है।

फिल्म के अंत में पाकिस्तानी सेना अधिकारी के अजन्मे बच्चे की मां बनने वाली आलिया भट्ट कहती है कि मैं इस बच्चे को मरने नहीं दूंगी। इंसानियत जिंदाबाद। भारत-पाक रिश्ता जिंदाबाद। देशभक्ति जिंदाबाद।

 


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