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हमारे पितामह की पुण्याई का सुफल है सप्रे संग्रहालय:डॉ अशोक सप्रे

वीथिका, मीडिया            Jun 19, 2019


मल्हार मीडिया भोपाल।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित पत्रकारिता का तीर्थ कहे जाने वाले माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय ने आज अपना 35वां स्थापना दिवस समारोह मनाया। इस अवसर पर माधवराव सप्रे के पौत्र डॉ. अशोक सप्रे ने कहा कि हमारे पितामह की पुण्याई का सुफल यह संग्रहालय है।

इसके कर्ताधर्ताओं की तपस्या ने पत्रकारिता का यह तीर्थ खड़ा कर दिया है। यह संस्थान पत्रकारिता की आने वाली पीढिय़ों को राह दिखाता रहेगा। संग्रहालय के सभागार में दो चरणों में आयोजित गरिमामयी कार्यक्रम में पत्रकारिता की दो युवा प्रतिभाओं के सम्मान के साथ ही सप्रे जी के पौत्र डॉ. अशोक सप्रे का अभिनंदन भी किया गया।

'आंचलिक अखबारों की राष्ट्रीय पत्रकारिता’ पर केन्द्रित गोष्ठी हुई। इस अवसर पर स्वराज के बलिदानी संपादकों के चित्रों को भी संग्रहालय की दीर्घा में संजोया गया।

मध्यप्रदेश के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा के साथ सप्रे परिवार की चौथी पीढ़ी सुरभि साठे सहित शहर के प्रबुद्धजन इन क्षणों के साक्षी बने।

इस अवसर पर जनसंपर्क मंत्री शर्मा ने कहा कि आज पत्रकार सिर्फ शब्द ही नहीं लिखे बल्कि लिखे शब्दों की विवेचना भी करे। शब्दों की मीमांसा करने वाली पत्रकारिता आज की जरूरत है।

कार्यक्रम के पहले चरण में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के वरिष्ठ संपादक श्यामलाल यादव को 'माधवराव सप्रे पुरस्कार’ प्रदान किया गया। श्यामलाल यादव ने सूचना के अधिकार को कारगर औजार के रूप में अपनाते हुए खोजी पत्रकारिता की मिसाल पेश की है।

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के संपादक पंकज चतुर्वेदी को सामाजिक सरोकारों के पत्रकारी-लेखन के लिए 'महेश गुप्ता सृजन सम्मान’ से सम्मानित किया गया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने आगे कहा कि आज पत्रकारिता अपने चरम पर है।

ऐसे समय में पत्रकार सिर्फ शब्द ही नहीं लिखे बल्कि उसके गूढ़ार्थ का विवेचन भी करे। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन बलिदानी संपादकों के चित्र यहां लगाए गए हैं उनके बैक्स मॉडल भी लगाए जाएं, ताकि उनके बारे में और जानकारी मिले।

शर्मा ने संग्रहालय की गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि मैं किसी न किसी रूप में इस संस्था से जुड़ा रहा हूं। आगे भी अपने स्तर पर तथा सरकार के स्तर पर आवश्यक मदद का भरोसा दिलाया।

अपने सम्मान के प्रतिउत्तर में श्यामलाल यादव ने कहा कि पत्रकारिता आज पर निर्भर है। सरकार ने जो सूचना का अधिकार दिया है वह पत्रकारों के लिए कारगर है।

इसी दम पर पत्रकारिता में बड़ा काम कर पाया जिसका सही मूल्यांकन यह पुरस्कार है।

पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि मेरे लिए यह क्षण अपने घर, अपने लोगों तथा अपने आदर्शों के बीच लौटने के क्षण हैं। उन्होंने एक आंचलिक पत्रकार के रूप में किए अपने संघर्षों को भी साझा किया।

आरंभ में संग्रहालय के संस्थापक-संयोजक विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि आज का यह स्थापना समारोह इसलिए भी विशिष्ट हो गया है क्योंकि जिनके नाम पर संग्रहालय है उस परिवार की तीसरी और चौथी पीढ़ी हमारे बीच है।

इसके अलावा ‘स्वराज’ के बलिदानी संपादकों के चित्र प्रदर्शित होना तथा मध्यप्रदेश से बावस्ता दो युवा पत्रकारों को यहां सम्मानित किया जाना भी अपने आप में सुखद संयोग है।

श्रीधर जी ने करीब साढ़े तीन दशक की संघर्ष यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि कमला पार्क के पास छोटी जगह से शुरू हुआ यह संग्रहालय आज पांच हजार करोड़ पृष्ठों की सामग्री अपने भीतर समाए हुए है। यह सिलसिला सतत जारी है।

आरंभ में सप्रे संग्रहालय के अध्यक्ष राजेन्द्र हरदेनिया ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रशस्ति वाचन डा. मंगला अनुजा ने किया तथा संचालन डा. राकेश पाठक ने किया।

 


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