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किताब चोर आईएएस

वीथिका            Jun 18, 2018


राम श्रीवास्तव।
एक बहुत वरिष्ठ सेवा निवृत आई ए एस अफसर हैं, उन्हें पुस्तक पढ़ने का बहुत बड़ा कीड़ा है पर किताबें खरीद कर नहीं पढ़ते। वह सज्जन जब प्रमुख सचिव थे तो सरकारी कालेजों और पब्लिक लाईब्रेरीयों में अपनी फौज फाटे के साथ चक्कर काटा करते थे।

वहॉ से चुन—चुन कर छांटकर पुरानी और रेअर किताबें बटोर कर ले जाते थे। बकायदा रजिस्टर पर अपने दस्तखतत करके। फिर वह पुस्तकें कभी नहीं लौटती थीं।

सुना है उनके घरेलू पुस्तकालय में इस तरह मारी हुई पचास हजार से ज्यादा किताबों का संग्रह है। इस जानकारी में कितनी सचाई है यह तो मैं नहीं जानता पर एक किस्सा मेरे साथ गुजरा।

जब मैं होलकर कालेज इन्दौर में प्राचार्य पद पर कार्यरत था, तब यह हजरत प्रमुख सचिव , मध्य प्रदेश शासन के पद पर शोभित थे। नेत्र विभाग के एच ओ डी (मेडीकल कालेज इन्दौर) डा० पी सी मित्तल के साथ यह पधारे।

होलकर महाराजा ने कालेज को अपनी निजी लायब्रेरी की जो पुस्तकें प्रदान की थी, उस अमूल्य धरोहर में से “बीस पुस्तकें” छांटकर वे अपने साथ ले गए। कालेज के इश्यू रजिस्टर पर बकायदा उन्होंने अपने हस्ताक्षर भी किये। पर वह विरली 20 किताबें कभी लौटकर नहीं आई ।

मैंने कई बार उन महोदय से फोन पर चर्चा करने की कोशिस की, हमेशा कहते रहे मैं किताबे ढूडकर पहुंचा रहा हूं। पर किताबें थीं कि कभी नहीं आई। बार बार याद दिलाने पर उनके पी ए ने फोन उठाना ही बन्द कर दिया।

फिर एक दिन मुझे बताया गया कि हमारे साहेब तो चैन स्मोकर हैं और जब भी दफ्तर में वह सिगरेट पीते हैं तो फाईलें छोडकर किताबें पढते हैं। जब मैं बल्लभ भवन जाकर उनसे मिलने की कोशिस में पहुंचा तो उन्होने मुलाकात नहीं दी।

पी ए श्रीमान ने कहा ऐसे तो किताबें बापिस मांगने बाले कई आते हैं। आप तो अब भूल जाइये उन्है राईट आफ कर दीजिये। सुनकर मैं चौंक गया। बाद में पता चला हजरत रिटायर हो गए ,,, किताबें साथ ले गए अब कहॉ हैं पता नहीं। मुझे भी रिटायर होना था।

इसके पहले लायब्रेरी से “नो ड्यूज सार्टिफिकेट “ होना जरूरी था, पर इश्यू रजिस्टर पर श्रीमान पुस्तक चहेते के दस्तखत होने के बाद भी, मेरी पेन्शन से उन बीस कीमती किताबों की कीमत के पैसे कटबाने पडे।

मेरे हिस्से में इश्यू रजिस्टर के पन्ने की फोटोकापी आज भी मौजूद है। तब से मुझे उन लोगों से बेहद नफरत हो गई है जो खुद किताबे खरीद कर नहीं पढ़ते और दूसरो की किताबें हड़प कर लेते हैं।

ममता यादव की पोस्ट पर एक कमेंट

 


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