
ममता मल्हार।
अतीत को कभी भविष्य से नहीं लड़ना चाहिए बल्कि उनके बगल में खड़े होकर, उनका साथ देकर उनकी बात सुननी चाहिए। यह जीत बच्चों की है बेशक! इस देश की जेनजी के उस प्रोटेस्ट की जीत है जो दुनिया के लिये आइडियल बन गया।
इनको नेपाल बांग्लादेश से कम्पेयर करने वालों को ध्यान देना चाहिए कि ये पिटे बहुत बुरे पिटे बावजूद इसके इन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया जो अन्य देशों में हुआ।
करीब डेढ़ दशक की जाति बिरादरी धर्म-मजहब की नफरत को इन्होंने पैरों की धूल बनाकर उड़ा दिया और इस बहाने ही सही वह सबकुछ हो गया जो जो बहुत सारे लोग नहीं कह पा रहे थे। मीडिया के लिए अब आत्ममंथन का समय है।
पूर्वाग्रह, अफवाह, मुगालते, नफरत फैलाने वालों पर सबकी नजर होती है और लोग मूरख नहीं होते। टीवी चैनल अपनी गलतफहमी दूर कर माफी मांगें बच्चों से और खुद के गिरेबान में झांकें।
इस सबके बावजूद धिक्कार के पात्र हैं वो लोग जिन्होंने इन्हें विदेशी फंडिड, आतंकी देशद्रोही, पाकिस्तानी कहा। जिन्होंने इनके पिटने पर खुशियां मनाईं।
इन्होंने माहौल बनाया की सवाल पूछना गुनाह नहीं, देशद्रोह नहीं, बल्क़ि जवाबदेही तय करना होता है।
LoveUGenz
तुम ही भविष्य हो।
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