मल्हार मीडिया भोपाल।
मौसम में बदलाव के बीच राजधानी भोपाल में वायरल और श्वसन संक्रमण (रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन) का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है।
इंदौर में 16 दिन इलाज के बाद उज्जैन की 60 वर्षीय महिला की स्वाइन फ्लू (एच1एन1) से मौत हो गई है, वहीं भोपाल में भी स्वाइन फ्लू के 6 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है।
शहर के जेपी, हमीदिया और एम्स की ओपीडी में रोजाना करीब 10 हजार मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें से 60 प्रतिशत (लगभग 6 हजार मरीज) गले में खराश, खांसी, बुखार, नाक बहने और थकान जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं।
अस्पतालों में जांच किट की कमी
जांच में बाधा: गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में एच1एन1 जांच किट खत्म हो चुकी है और एम्स में भी इसकी जांच नहीं हो पा रही है।
निजी लैब पर निर्भरता: कोविड की नियमित जांच बंद होने के कारण अब केवल गंभीर रूप से बीमार मरीजों का ही निजी अस्पतालों में वायरल पैनल टेस्ट कराया जा रहा है।
देशभर में बढ़ रहे मामले, एमपी में अलर्ट नहीं
दिल्ली: वर्ष 2026 में अब तक स्वाइन फ्लू के 1,344 मामले सामने आ चुके हैं।
बेंगलुरु: फ्लू जैसे लक्षणों के कारण 500 छात्र और 21 कर्मचारी बीमार हुए हैं।
राज्य की स्थिति: दिल्ली, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में तेजी से मामले बढ़ने के बावजूद मध्य प्रदेश में फिलहाल
कोई औपचारिक अलर्ट जारी नहीं किया गया है।
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घबराएं नहीं, सतर्कता बरतें
चिकित्सकों के अनुसार इस मौसम में घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन बचाव के लिए कुछ कदम उठाना जरूरी है:
दूरी बनाए रखें: संक्रमित व्यक्ति घर के अन्य सदस्यों से यथासंभव दूरी बनाकर रखे।
मास्क का प्रयोग: भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाते समय मास्क पहनें।
हाथों की स्वच्छता: हाथों को बार-बार साफ करें और खांसते या छींकते समय मुंह व नाक को ढकें।
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