मल्हार मीडिया भोपाल।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के निशातपुरा इलाके में जिला प्रशासन ने उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) के सख्त निर्देशों के बाद एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है।
लगभग 35 वर्षों से चली आ रही अतिक्रमण की समस्या का समाधान करते हुए प्रशासन ने प्राइवेट जमीन पर बने 11 पक्के मकानों को चार पोकलेन मशीनों की मदद से पूरी तरह जमींदोज कर दिया।
किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति या हंगामे से निपटने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। यह पूरी कार्रवाई सुबह से लेकर शाम तक अनवरत जारी रही।
इस बड़ी विध्वंस कार्रवाई का संचालन बैरागढ़ के अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) रवीश कुमार श्रीवास्तव की प्रत्यक्ष मौजूदगी में किया गया। उनके साथ तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह सहित अन्य राजस्व विभाग के प्रमुख अधिकारी और भारी पुलिस अमला पूरी मुस्तैदी के साथ मैदान में डटा रहा। प्रशासन की इस सख्त और समन्वित कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
पूर्व में भी जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन स्थानीय विरोध के कारण कार्रवाई रोकनी पड़ी थी। इस बार पुलिस और प्रशासन की सख्त चेतावनी के बाद यह अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद अविनाश जौहरी की निजी स्वामित्व वाली जमीन से जुड़ा है, जिस पर लंबे समय से अवैध कब्जा जमा लिया गया था।
स्थिति यह थी कि मूल जमीन की रजिस्ट्री होने के बावजूद उस पर अनधिकृत कब्जे कर 35 साल के भीतर तीन मंजिला तक मकान खड़े कर दिए गए थे।
अपनी 0.75 एकड़ जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए जमीन मालिक अविनाश जौहरी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और याचिका दायर की थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने भोपाल कलेक्टर, नगर निगम और पुलिस प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे अवैध कब्जे के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करें।
अदालत ने आदेश में यह भी निर्देशित किया था कि जिन पक्षों के पास न्यायालय का स्थगन (स्टे) आदेश है, उन्हें फिलहाल छोड़कर बाकी सभी अवैध निर्माणों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
इसी क्रम में मंगलवार को जिला प्रशासन की टीम ने भारी पुलिस बल के साथ मोर्चा संभाला और अवैध निर्माणों को गिराने का अभियान शुरू कर दिया।
इस पूरी कार्रवाई के दौरान एक अन्य पहलू भी सामने आया है। मौके पर लगभग 0.3 एकड़ भूमि सरकारी जमीन के रूप में भी चिन्हित है, जिस पर भी अवैध कब्जा जमा हुआ है।
हालांकि, इस हिस्से के कुछ मामलों पर हाईकोर्ट का स्टे (स्थगन आदेश) प्रभावशील है, जिसके चलते फिलहाल इस हिस्से पर बुलडोजर की कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि अदालती आदेशों के निस्तारण के बाद सरकारी जमीन को भी जल्द ही अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा।
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